Monday, Mar 01, 2021
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जम्मू-कश्मीर के शोपियां में 5 महीने पहले क्या हुआ था? जानें ‘फर्जी’ एनकाउंटर की पूरी कहानी...

  • Updated on 12/28/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय सेना के कुछ जवानों पर जम्मू कश्मीर (Jammu kashmir) के शोपियां जिले में तीन युवकों को ‘फर्जी’ मुठभेड़ (Shopian Fake Encounter) में मार गिराने का आरोप लगाया गया था। इन युवकों के परिवारों की मांग पर सेना ने आरोपों की जांच करना शुरू की थी जो अब पूरी हो चली है। 

जांच में सेना के एक अधिकारी समेत तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया कि आरोप पत्र शनिवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत, शोपियां में दायर किया गया। 

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अदालत में चार्जशीट दायर 
उन्होंने यह भी बताया कि इस आरोप पत्र में सेना की 62 राष्ट्रीय राइफल्स के कैप्टन भूपिंदर, बिलाल अहमद और ताबिश अहमद को कथित फर्जी मुठभेड़ में उनकी भूमिका के लिए आरोपी बनाया गया है। फ़िलहाल इस मामले को लेकर शोपियां की अदालत में चार्जशीट भी दायर कर दी गई है। इस मसले को लेकर किसी बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। 

यह मामला जुलाई का है जब 18 जुलाई को भारतीय सेना ने जम्मू कश्मीर के शोपियां जिले के अमशीपोरा गांव में एक मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। इस एनकाउंटर के बाद इन तीन लड़कों की तस्वीर सोशल मीडिया पर आई थी जिससे लोगों ने सवाल उठाने खड़े कर दिए थे। 

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मृतक लड़कों के परिवारवालों ने कहा
दरअसल, इन फोटोज को देखकर राजौरी के तीन परिवारों ने बताया कि वे तीनों लड़के उनके परिवारों के हैं और वो 17 जुलाई से ही लापता हैं और 17 जुलाई के तीन दिन बाद ही उन तीनों के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर सामने आई थी।

इन लड़कों के नाम इम्तियाज अहमद (20 वर्ष), मोहम्मद इबरार (25 वर्ष) और इबरार अहमद (16 वर्ष) बताए गए थे। एनकाउंटर को लेकर मृतक लड़कों के परिवारवालों का कहना था कि ये तीनों लड़के 16 जुलाई को काम के सिलसिले में कश्मीर गए थे और उसके बाद से ही लापता थे।

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वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा....
वहीँ, इस मामले में हुईं जांच को लेकर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कोर्ट मार्शल हो सकता है। इससे पहले सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया था जब यह खबर सोशल मीडिया छा गई थी। जिसमें यह कहा जा रहा था कि सेना के जवानों ने एक मुठभेड़ में तीन युवकों को आतंकवादी बताकर मार गिराया है।

बताते चले कि इस मामले को लेकर कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की जांच सितंबर में खत्म हो चुकी थी। शुरूआती जांच में पाया था कि 18 जुलाई की मुठभेड़ के दौरान इन जवानों ने सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफ्सपा) के तहत मिली शक्तियों के नियमों का उल्लंघन किया था।

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