Tuesday, Mar 31, 2020
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J&K: राजनायिकों के सामने व्यापारियों ने रखी मांग, कहा- केंद्र सरकार घाटी में बढ़ाए विकास की रफ्तार

  • Updated on 2/13/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में जब से अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाया गया है तब से घाटी में कई पाबंदियां लगी हुई है। इन क्षेत्रों को अलग केंद्र प्रशासित राज्य तो घोषित कर दिया गया लेकन यहां अभी भी सुविधाए नहीं बहाल नहीं हैं। घाटी के लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों के कारण व्यापारियों का भारी नुकसान हुआ है। 

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स्थानिय व्यपारियो से बातचीत
बता दें कि कल घाटी में हालात का जायजा लेने 25 विदेशी राजनयिकों के प्रतिमंडल ने से बातचीत के दौरान वहां रह रहे व्यापारियों और अन्य लोगों ने ये बात कही। वहीं कुछ लोगों ने राजनयिकों के सामने विकास की रफ्तार में तेजी लाने की भी बात कही।

वहीं सेब के व्यापारियों ने बताया कि पड़ोसी देश उनके व्यापार को खत्म करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक घाटी में शांति बहाल नहीं की जाएगी तब तक यहां विकास की रफ्तार धीमी ही रहेगी।

राजनयिकों ने व्यापारियों के अलावा सिविल सोसाइटी के लोगों से भी मुलाकात की, उन्होंने घाटी में जल्द से जल्द इंटरनेट सुविधा बहाल करने की मांग की है जिससे घाटी में हालात पहले जैसे समान्य हो सकेंगे। 

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जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश, उपराज्यपाल, अधिकारियों से मुलाकात
बता दें कि 25 विदेशी राजनायिकों का दूसरा जत्था आज जम्मू का दौरा करेगा। जहां वो जम्मू-कश्मीर (Jammu And Kashmir) के मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, जिला प्रशासन के अधिकारियों और जम्मू संभाग के नागरिक समाज के सदस्यों के साथ बैठक करेंगे।

जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के तहत प्राप्त विशेष दर्जा वापस लेने के 6 महीने बाद केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति का मौके पर जाकर आकलन करने के उद्देश्य से विदेशी राजनयिकों का दूसरा जत्था बुधवार को यहां पहुंचा था। 

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25 देशों के प्रतिनिधियों का कश्मीर दौरा
अधिकारियों ने बताया कि 20 से अधिक देशों के राजनयिकों का यह जत्था बुधवार सुबह करीब 11 बजे श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचा लेकिन खराब मौसम के कारण वे तय कार्यक्रम के अनुरूप उत्तर कश्मीर के बारामूला (Baramulla) जिले के दौरे पर नहीं जा सके। उन्होंने बताया कि ये राजनयिक यहां एक होटल में ठहरे हैं और बारामूला नहीं जा पाने के बाद, वे प्रसिद्ध डल झील में शिकारा की सैर करने गए।

डल झील में शिकारा का आनंद उठाया- अधिकारी
अधिकारियों ने कहा कि विदेशी राजनयिकों के दूसरे जत्थे में यूरोपीय संघ, दक्षिण अमेरिका एवं खाड़ी के देशों के राजदूत हैं। भारत (India) में अफगानिस्तान (Afghanistan) के राजदूत ताहिर कादरी ने ट्वीट किया, 'यहां आने के बाद हमने कश्मीर के श्रीनगर में स्थित डल झील में शिकारा सैर का आनंद उठाया। एक नाव पर लगी दुकान से मैंने एक बेहद खूबसूरत कश्मीरी अंगूठी खरीदी।

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विभिन्न शिष्टमंडलों से करेंगे बातचीत
अधिकारियों ने बताया कि विदेशी राजनयिकों के इस दौरे का लक्ष्य विशेष दर्जा वापस लेने के बाद क्षेत्र में मौके पर जाकर स्थिति का आकलन करना है। इस दौरान विदेशी राजनयिक अपने प्रवास के दौरान विभिन्न शिष्टमंडलों से बातचीत करेंगे।

उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी भी शिष्टमंडल को संबोधित करेंगे। इससे पहले जनवरी में 15 विदेशी राजनयिकों का एक दल जम्मू कश्मीर गया था और स्थिति का आकलन किया था। इस दल में अमेरिकी राजदूत केनेथ आई जस्टर भी शामिल थे।

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