Sunday, Feb 18, 2018

विरोध पर अड़े रहे तो शाह की रैली से पहले हो सकती है जाट नेताओं की गिरफ्तारी

  • Updated on 2/9/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अमित शाह की 15 फरवरी को होने वाली रैली में व्यवधान डालने की जाट नेताओं की धमकी के बाद सरकार पूरी तरह सतर्कता से काम ले रही है। खुफिया विभाग सरकार को पल-पल की जानकारी मुहैया करवा रहा है। रैली में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचे, इसके लिए पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। रैली से पहले प्रमुख जाट नेताओं की गिरफ्तारी भी हो सकतीहै। 

रैली को शांतिपूर्ण तरीके से सफल बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। सरकार को एक की बजाय 2 मोर्चों पर सतर्कता बरतनी पड़ रही है। एक ओर जाट पूर्व में सरकार के साथ हुए समझौते की सभी शर्तों को पूरा करवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं तो दूसरी ओर इनैलो ने भी शाह का विरोध करने की घोषणा की हुई है। 

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इनैलो का विरोध सरकार के लिए उतनी बड़ी चुनौती नहीं है जितना जाटों का। जाट नेताओं ने चेतावनी दी हुई है कि वे प्रदेश भर से ट्रैक्टर-ट्रालियों में जींद पहुंचेंगे। वहां वे अमित शाह के रैली स्थल पर एकत्रित होंगे। सरकार जाटों को मनाने के लिए 70 केस वापस लेने की घोषणा कर चुकी है। इन केसों के वापस होने से 822 लोगों को जेल से रिहाई मिल सकेगी। इसके बावजूद सरकार का यह कदम जाटों को मनाने के लिए कारगर साबित नहीं हुआ। हालांकि सरकार के इस कदम से गैर-जाट वर्ग नाखुश नजर आ रहा है जिसका असर शाह की रैली में देखने को मिल सकता है।

भाजपा सांसद राजकुमार सैनी खुलेआम सरकार के इस कदम की निंदा कर रहे हैं। कई गैर-जाट नेताओं को भी सरकार का यह निर्णय रास नहीं आ रहा। यह बात और है कि ऐसे नेता खुलकर बोलने से बच रहे हैं। अगर सरकार इस समय जाटों की सभी शर्तों को मानती है तो उससे गैर-जाट तबका नाराज हो सकता है। इसका रैली पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। मुख्य बात यह है कि अगर जाट ट्रैक्टर-ट्रालियों से जींद पहुंचते हैं तो इससे सड़कों पर यातायात व्यवस्था तार-तार हो जाएगी। बड़ी संख्या में मोटरसाइकिलों से आने वाले भाजपा कार्यकत्र्ताओं के लिए सड़कों से निकलना मुश्किल बन जाएगा। दूसरी ओर जाट बाहुल्य इलाकों में रैली में जाने वाले लोगों को रोकने का प्रयास किया जाएगा। 

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसी स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी की जा रही है। खुफिया तंत्र पूरी तरह एक्टिवहो चुका है। पुलिस के आला अधिकारी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार अगर जाटों ने रैली के विरोध का निर्णय वापस नहीं लिया तो रैली से पहले प्रमुख जाट नेताओं की गिरफ्तारी हो सकती है।

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