Friday, Jul 23, 2021
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तेजस्वी, तेज प्रताप के चुनावी हलफनामे को लेकर चुनाव आयोग से मिला जदयू शिष्टमंडल

  • Updated on 11/3/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जनता दल यूनाइटेड के एक शिष्टमंडल ने मंगलवार को चुनाव आयोग से विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव पर चुनावी हलफनामे में अपनी सम्पत्ति छिपाने का आरोप लगाया और इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने की मांग की। जदयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि हमने मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात की और उनके समक्ष एक ज्ञापन पेश किया। 

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इसमें हमने प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में दिए गए हलफनामे में संपत्ति को छिपाने का उल्लेख किया और इस संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हमने चुनाव आयोग से इस मामने को गंभीरता से लेने और लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (2) के तहत कार्रवाई किए जाने की माँग की। 

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कुमार ने राजद नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘हमने हलफनामे में आप पर जालसाजी का आरोप लगाया है और राजनीति में पात्रता बहुत आवश्यक है, ऐसे में तेजस्वी यादव जी अब आपकी जुबान क्यों नहीं चल रही है?’’ जदयू नेता ने कहा कि ‘अपराधियों के संरक्षणकर्ता’ महागठबंधन को जनता ने नकारा है। लोजपा, महागठबंधन और राजद एक ही बोली बोल रहे हैं।

भाकपा सांसद ने आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग को पत्र लिखा 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद विनय विश्वम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया है। खबरों का संदर्भ देते हुए विश्वम ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने आधिकारिक पीआर ई-मेल के जरिए भेजे न्यूजलेटर में भारतीय जनता पार्टी के कार्यों के लिए चंदा का निवेदन किया। 

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विश्वम ने आरोप लगाया कि 21 अक्टूबर को पीएमओ के एक न्यूजलेटर में एक विज्ञापन था जिसमें ‘‘देश को आगे रखने वालों का समर्थन’’ करने की बात कही गयी। चंदा के जरिए ‘‘भाजपा का समर्थन’’ करने को कहा गया। इसमें एक ङ्क्षलक पर क्लिक करने पर एक और पेज खुल गया जिसमें भाजपा के लिए पांच रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक चंदा देने का निवेदन किया गया। 

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वाम दल के सांसद ने कहा, ‘‘सत्ता और पद का दुरुपयोग हर स्थिति में निंदनीय है, खासकर 25 सितंबर को बिहार चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने के कारण यह गंभीर मामला है। ‘सत्ताधारी दल’ पर आदर्श आचार संहिता का सातवां अध्याय साफ तौर पर कहता है कि सरकारी तंत्र और पद का इस्तेमाल सत्ताधारी दल के हित में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।’’ 

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विश्वम ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री कार्यालय के जरिए भाजपा के लिए चंदा का निवेदन प्रारंभिक नजर में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। मुक्त और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करवाना निर्वाचन आयोग का मुख्य लक्ष्य होता है।’ उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि वह मामले की जांच करे और चुनावी संहिता का किसी भी प्रकार का उल्लंघन होने पर आवश्यक कदम उठाए। विश्वम ने कहा, ‘‘आशा है कि मामले में तेजी से और निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी।’’ 

 

 

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