Sunday, Dec 04, 2022
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जिग्नेश मेवानी को मिली जमानत, कोर्ट ने की असम पुलिस की खिचाई

  • Updated on 4/29/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल।  असम के बारपेटा जिले की एक अदालत ने गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी को एक महिला पुलिस अधिकारी पर कथित ‘‘हमले’’ से संबंधित एक मामले में शुक्रवार को जमानत प्रदान करते हुए ‘‘झूठी प्राथमिकी' दर्ज करने के लिए राज्य पुलिस की खिचाई की। बारपेटा जिला एवं सत्र न्यायाधीश अपरेश चक्रवर्ती ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते पिछले एक साल में पुलिस मुठभेड़ों का उल्लेख करते हुए गौहाटी उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह राज्य पुलिस बल को ‘‘खुद में सुधार’’ करने का निर्देश दे।   

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  बारपेटा रोड पुलिस थाने में दर्ज मामले में मेवानी को एक हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई। मेवानी को महिला पुलिस अधिकारी पर कथित रूप से उस समय हमला करने के आरोप में सोमवार को गिरफ्तार किया गया था, जब उन्हें एक पुलिस दल द्वारा गुवाहाटी से कोकराझार ले लाया जा रहा था। अदालत ने कहा कि दो अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में महिला पुलिस अधिकारी का शील भंग करने की मंशा का आरोप आरोपी के खिलाफ नहीं लगाया जा सकता, जब वह उनकी हिरासत में था और जिसे किसी और ने नहीं देखा।   

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 न्यायाधीश ने कहा कि उच्च न्यायालय असम पुलिस को ‘‘मौजूदा मामले की तरह झूठी प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों को गोली मारने और मारने या घायल करने वाले पुलिस र्किमयों को रोकने के लिए खुद में सुधार करने का निर्देश देने पर विचार कर सकता है, जो राज्य में एक नियमित घटना बन गई है।’’  आदेश में कहा गया है कि उच्च न्यायालय कानून और व्यवस्था की ड्यूटी में लगे प्रत्येक पुलिस कर्मी को ‘‘बॉडी कैमरा पहनने, किसी आरोपी को गिरफ्तार करते समय या किसी आरोपी को सामान या अन्य कारणों से किसी स्थान पर ले जाने के दौरान वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, सभी पुलिस थानों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश देने पर भी विचार कर सकता है।’’  

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    इसमें कहा गया है, ‘‘अन्यथा हमारा राज्य एक पुलिस राज्य बन जाएगा जिसे समाज बर्दाश्त नहीं कर सकता।’’     अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश को उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रस्तुत किया जाए ताकि इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए और वह इस पहलू पर गौर करें और इस बात पर विचार करें कि क्या इस मामले को ‘‘राज्य में जारी पुलिस ज्यादतियों पर रोक लगाने के लिए एक जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में लिया जा सकता है।’’

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     कांग्रेस सर्मिथत गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को पिछले सप्ताह असम पुलिस के एक दल ने गुजरात से पकड़ा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित रूप से किये गए एक ट््वीट के लिए उनके खिलाफ एक मामले में गिरफ्तार किया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘‘गोडसे को भगवान मानते हैं।’’  ट््वीट को लेकर मामले में सोमवार को जमानत पर रिहा किये जाने के बाद गुजरात के दलित नेता को उस महिला पुलिसकर्मी पर हमले के आरोप में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था जो उस पुलिस दल में शामिल थी जो मेवानी के साथ कोकराझार गया था। हमले के मामले में एक शिकायत बारपेटा में दर्ज की गई।   

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  मेवानी के वकील अंगशुमान बोरा ने बताया कि मेवानी को पहले कोकराझार ले जाया जाएगा क्योंकि वहां की अदालत से जमानत मिलने के बाद कुछ औपचारिकताएं पूरी की जानी बाकी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जमानत मिलने और बारपेटा लाए जाने के तुरंत बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। कोकराझार में औपचारिकताएं अभी पूरी की जानी बाकी हैं।’’     इन औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद मेवानी को गुवाहाटी ले जाये जाने की संभावना है।     बारपेटा मामले में, मेवानी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 323, 353 और 354 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

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