Tuesday, Nov 29, 2022
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jitendra narayan tyagi waseem rizvi arrested haridwar dharma sansad case after court rkdsnt

कोर्ट के कड़े रुख के बाद धर्म संसद मामले में जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी गिरफ्तार

  • Updated on 1/13/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। हरिद्वार धर्म संसद मामले में उत्तराखंड पुलिस ने जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ वसीम रिजवी को गिरफ्तार कर लिया है। जितेंद्र नारायण त्यागी पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप हैं। उत्तराखंड पुलिस की ये कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद देखने को मिला है।

उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित‘धर्म संसद’में कथित तौर पर घृणा फैलाने वाले भाषण देने के मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बृहस्पतिवार को वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी को गिरफ्तार करने के साथ ही दो अन्य आरोपियों यति नरसिंहानंद और साध्वी अन्नपूर्णा को पेश होने के लिए नोटिस जारी किए। ये तीनों उन अन्य लोगों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि रिजवी को जहां गिरफ्तार किया गया है, वहीं यति नरसिंहानंद और साध्वी अन्नपूर्णा को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 के तहत पेश होने के लिए नोटिस भेजे गए हैं। 

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 यति नरसिंहानंद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर के पुजारी हैं जोकि अपने बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं। यति नरसिंहानंद ने हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन किया था जबकि साध्वी अन्नपूर्णा ने आयोजन में वक्ता के रूप में भाग लिया था, जहां मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर भडकाऊ भाषण दिए गए। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेंद्र रावत ने बताया कि रिजवी को रूड़की के नारसन बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया।     कुछ माह पूर्व हिंदू धर्म अपनाने के बाद जितेंद्र नारायण त्यागी बने 52 वर्षीय लखनऊ निवासी वसीम रिजवी का नाम उन 10 से ज्यादा लोगों में शामिल है, जिनके खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। रिजवी उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख रह चुके हैं। 

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हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर तक हुई धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ कथित रूप से भडकाऊ भाषण देने के मामले में यह पहली गिरफ्तारी है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले में और भी गिरफ्तारी होंगी? पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह आगे विवेचना पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि धर्म संसद में कथित भडकाऊ भाषण देने के मामले में कार्रवाई करने को लेकर राज्य सरकार पर चौतरफा दबाव पड़ रहा था। इस मामले में बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने भी घटना के इतने दिनों बाद भी कोई कार्रवाई न करने के लिए राज्य सरकार की खिंचाई की थी। 

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने हरिद्वार और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल में आयोजित हुए कार्यक्रमों में कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र, दिल्ली पुलिस और उत्तराखंड पुलिस से जवाब मांगा था। 

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प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ याचिका पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गई और उसने इस पर नोटिस जारी किये। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में ‘धर्म संसद’ के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी। न्यायालय ने मामले में आगे की सुनवाई को 10 दिन बाद के लिए सूचीबद्ध किया। 

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शीर्ष अदालत ने पत्रकार कुर्बान अली और पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश की याचिका पर प्रतिवादिों को नोटिस जारी किये हैं। याचिका में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने वाले भाषण देने की घटनाओं की एसआईटी (विशेष जांच दल) से ‘‘ स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जांच कराने’’ का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने जब कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी कर रही है और उसने 10 दिन बाद सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध किया है, तो याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एकमात्र समस्या यह है कि इस बीच 23 जनवरी को अलीगढ़ में एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन होने वाला है और वे नहीं चाहते कि इसका आयोजन किया जाए। सिब्बल ने पीठ से इस मामले को 17 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध किया। 

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सिब्बल ने कहा कि ‘धर्म संसद’ आयोजित किए जाने की रोजाना घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया आगे की सुनवाई के लिए कोई निकटतम तारीख दी जाए, क्योंकि उन्होंने एक और धर्म संसद की घोषणा कर दी है। आज उत्तर प्रदेश में जो रहा है उसके बीच अगली धर्म संसद का आयोजन अलीगढ़ में 23 जनवरी को होना है।’’ पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या शीर्ष अदालत की कोई और पीठ इस प्रकार के मामले को उठाने वाली याचिका पर पहले से सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत की किसी अन्य पीठ के समक्ष इस प्रकार का मामला लंबित नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिस पर सुनवाई होनी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कोई अन्य पीठ पहले से ही इसी तरह की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में पेश हुए एक अन्य वकील ने कहा कि नफरत फैलाने वाली सामग्रियों संबंधी कुछ मामले लंबित हैं लेकिन ये‘धर्म संसद’से संबंधित नहीं हैं। 

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पीठ ने कहा, ‘‘हम नोटिस जारी कर रहे हैं।’’ उसने कहा, ‘‘इसे 10 दिन बाद के लिए सूचीबद्ध कीजिए। हम देखेंगे कि क्या यह मामला किसी अन्य मामले से जुड़ा है, तो हम इसे सूचीबद्ध करेंगे, अन्यथा हम सुनवाई करेंगे।’’ उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार की घटना को लेकर पिछले साल 23 दिसंबर को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत संत धर्मदास महाराज, साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडे, यति नरसिंहानंद और सांगर सिंधु महाराज सहित कुछ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी तरह की शिकायत दिल्ली पुलिस से राष्ट्रीय राजधानी में हुए दूसरे कार्यक्रम के संदर्भ में की गई। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड और दिल्ली पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।

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