Monday, Aug 15, 2022
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जेएनयू हिंसा : छात्र संघ प्रतिनिधिमंडल ने की कुलपति शांतिश्री से मुलाकात, आइशी असंतुष्ट

  • Updated on 4/13/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूसू) के सदस्यों ने बुधवार को कुलपति शांतिश्री धूलिपदी पंडित से मुलाकात कर 10 अप्रैल को छात्रों के दो समूहों के बीच हुई झड़प की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति से करवाने की मांग की। जेएनयूसू के छह सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया गया कि मामले में प्रॉक्टर स्तरीय जांच शुरू की जाएगी। विश्वविद्यालय परिसर के कावेरी छात्रावास के मेस में ‘मांसाहारी’ भोजन परोसने को लेकर 10 अप्रैल को दो समूहों के बीच हुई झड़प में कम से कम 20 छात्र घायल हो गए थे। 

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बैठक के बाद, जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने खुल कर अपनी बात रखी और पूछा कि जब झड़प के दिन कावेरी छात्रावास में मांस विक्रेता को अनुमति नहीं दी गई तो प्रशासन ने कुछ क्यों नहीं किया।’ घोष ने कहा कि, प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि कुलपति को घायल छात्रों से मिलना चाहिए, जो उन्होंने अब तक नहीं किया है। 

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उन्होंने कहा,‘‘हमें बताया गया है कि एक प्रॉक्टर स्तरीय जांच शुरू की जाएगी और यह उन सभी छात्रों के लिए खुली होगी, जो अपनी गवाही और साक्ष्य देना चाहते हैं।‘’ घोष ने कुलपति को मंगलवार रात की उस घटना के बारे में भी अवगत कराया जब, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के वाचनालय में एक महिला को धमकाया गया। घोष ने कहा कि, प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के समक्ष इस मुद्दे को भी उठाया है। 

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छात्र संघ की अध्यक्ष ने बताया कि, 'कुलपति ने डीन ऑफ स्टूडेंट्स को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी छात्र किसी भी तरह से असहज या डरा हुआ महसूस न करे।' पंडित को सौंपे गए एक ज्ञापन में, छात्र संघ ने उल्लेख किया कि कावेरी छात्रावास में हिंसा की शुरुआत छात्रों के एक समूह द्वारा छात्रावास के मेस में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने से हुई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पहले कहा था कि रामनवमी पर आयोजित पूजा शाम 5 बजे शुरू हुई और साथ ही इफ्तार भी हो रहा था। हालांकि, जेएनयूएसयू ने कहा, 'इफ्तार शाम 6:45 बजे आयोजित किया गया था, न कि शाम 5 बजे।' 

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जेएनयूएसयू ने ज्ञापन में, विश्वविद्यालय से 11 अप्रैल को जारी अपने बयान को वापस लेने के लिए भी कहा, जिसमें कहा गया था कि रामनवमी पर आरएसएस से जुड़े एबीवीपी द्वारा 'शांतिपूर्वक' आयोजित एक‘हवन’पर कुछ छात्रों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद झड़पें हुईं। छात्रों के निकाय ने मांग की कि जेएनयू प्रशासन इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई कर 'स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से' विचार करे। ज्ञापन में, संघ ने मांग की कि जेएनयू प्रशासन या तो न्यायिक जांच करे या मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ एक समिति का गठन करे।

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