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JNU में हिंदी की अनिवार्यता पर विवाद, छात्रों ने मातृभाषा मानने से किया इनकार

  • Updated on 6/27/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) में अंडर ग्रैजुएट बीए (Under Graduate) और बीटेक कोर्स (B.tech Course) में हिंदी (Hindi) विषय को अनिवार्य करने को लेकर विवाद शुरु हो गया है। एक तरफ छात्र संघ (JNU Student Union) जेएनयू प्रशासन पर हिंदी अनिवार्य करने का आरोप लगा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रशासन ने इसे कोरी अफवाह करार दिया है। 

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HRD के पत्र को बताया विवादस्पद 

इस मुद्दे पर जेएनयू छात्र संघ का कहना है कि 2018 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जो पत्र जारी किया गया था, वो ही विवादस्पद था। पत्र में लिखा गया है कि हिंदी हमारी मात्र भाषा है जबकि हमारे संविधान में ये साफ-साफ लिखा है कि भारत की कोई मात्र भाषा नहीं है। यह सभी भाषाओं को समान अधिकार और दर्जा दिया गया है किसी एक की अनिवार्यता नहीं है।

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'हर राज्य का छात्र JNU में पढ़ता है'

छात्रों का कहना है कि जेएनयू में विभिन्न राज्यों से छात्र आते हैं जिनकी मात्र भाषा अलग-अलग होती है। ऐसे में हिंदी की अनिवार्यता बिलकुल गलत है। छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस नियम को प्रशासन लागू करेगा तो वो इसेक खिलाफ हाईकोर्ट तक जाएंगे। 

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छात्रों समेत फैकल्टी की ली जाएगी राय

वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन इस बता से साफ इंकार कर रहा है कि उनकी तरफ से ऐसा कोई नियम लागू किया जाना है। प्रशासन की तरफ से यह कहा जा रहा है कि वह किसी भी कोर्स में हिंदी को अनिवार्य नहीं कर रहे हैं। 28 जून को अकैडमिक कॉउंसिल की बैठक होनी हैं जिसमें केवल इस विषय पर छात्रों समेत फैकल्टी की राय ली जायेगी।

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