Thursday, Feb 25, 2021
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JNU छात्र उमर अपने निष्कासन को कोर्ट में देंगे चुनौती, RSS पर साधा निशाना

  • Updated on 7/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र उमर खालिद ने आज कहा कि छात्र नहीं झुकेंगे और उन्होंने कहा कि 9 फरवरी 2016 की विवादित घटना के संबंध में उनका निष्कासन बरकरार रखने की यूनिवर्सिटी की एक समिति की सिफारिश को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।  

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यह घटना संसद हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के खिलाफ परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारेबाजी से संबंधित है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में खालिद ने कहा कि बीते 2 साल में यह तीसरी बार है, जब प्रशासन इस मामले में उनके खिलाफ निष्कासन आदेश लेकर आया है, जिसमें से 2 बार के आदेश को कोर्ट द्वारा निरस्त किया जा चुका है।  

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उन्होंने कहा , 'हम एक बार फिर इस जांच, इसके निष्कर्षों और फैसले को खारिज करते हैं। यह नैर्सिगक न्याय के सभी सिद्धांतों के विरुद्ध है और यह झूठ, विरोधाभासों और द्वेषपूर्ण मंशा से पटा है, जिसका फिर जल्द ही पर्दाफाश हो जाएगा। हम फिर इसे कोर्ट में चुनौती देंगे।' जेएनयू के पीएचडी शोधार्थी ने कहा कि उन्हें जांच द्वारा व्यवस्थित और द्वेषपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और जांच पहले दिन से हमारे खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त थी।

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खालिद ने अपने बयान में भाजपा और संघ पर भी निशाना साधा है। उमर कहते हैं,  'सत्तारूढ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदेशों पर चल रहा प्रशासन किसी भी वक्त निष्पक्ष तरीके से इस जांच को पूरा करने की स्थिति में नहीं था। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में बार-बार खामी पाई और उसने हमारी चिंताओं को सही साबित किया।'

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बता दें कि जेएनयू की हाई लेवल जांच समिति ने फरवरी 2016 की विवादित घटना के संबंध में उमर खालिद के निष्कासन और छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10,000 रुपये के जुर्माने को बिल्कुल सही ठहराया है। इसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इस मामले से पल्ला झाड़ लिया था। उन्होंने कहा था कि जेएनयू प्रशासन को अपना का करने दिया जाए। 

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