Thursday, Jan 27, 2022
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JNU vice-chancellor has no right to choose chairman of special centers-schools: court

जेएनयू कुलपति को विशेष केंद्रों-स्कूलों के चेयरमैन अध्यक्ष चुनने का अधिकार नहींः अदालत

  • Updated on 11/3/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 9 केंद्रों के प्रमुखों के कोई भी बड़ा फैसला लेने पर रोक लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति ने इन केंद्रों के प्रमुखों की नियुक्ति प्रथम दृष्टया बिना किसी अधिकार के की है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने कहा कि कुलपति के पास केंद्रों या विशेष केंद्रों के अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है क्योंकि जेएनयू के विधान में नियुक्ति का अधिकार कार्य परिषद को दिया गया है।

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जेएनयू में 9 सेंटरों के चेयरमैनों की नियुक्ति का फैसला कुलपति ने बिना अधिकार के लिया: अदालत
प्रोफेसर अतुल सूद की याचिका पर नियुक्तियों पर रोक लगाने से इनकार करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह व्यवस्था दी। अदालत ने केंद्रों/विशेष केंद्रों के प्रभावी कामकाज के लिए अध्यक्ष की जरूरत को संज्ञान में लेते हुए नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे एकल न्यायाधीश से आग्रह किया कि रिट याचिका पर सुनवाई पहले कर लें। पीठ ने 26 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया हमारी राय है कि प्रतिवादी संख्या 2 (कुलपति) को केंद्रों/विशेष केंद्रों के अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार नहीं है। विधान में नियुक्ति का अधिकार कार्य परिषद को दिया गया है। अत: स्पष्ट होता है कि प्रतिवादी संख्या 2 द्वारा केंद्रोंं/विशेष केंद्रों के प्रमुखों की नियुक्ति प्रथम ²ष्टया बिना अधिकार के की गई है।

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जेएनयूटीए ने इस मामले में कुलपति के फैसलों की निंदा की 
मामले पर जेएनयू की वकील मोनिका अरोड़ा ने कहा कि विभिन्न केंद्रों में अध्यक्षों की नियुक्ति करने की शक्ति समय-समय पर कु लपति द्वारा प्रयोग की जाती है। जिसे बाद में कार्यकारी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाता है। न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि वह इस पहलू की जांच प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। मामले पर जेएनयूटीए की सचिव मौसमी बसु ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जेएनयू शिक्षक संघ कार्यकारी कुलपति एम. जगदेश कुमार के इस व्यवहार की निंदा करता है। जोकि विवि. में जल्दबाजी में व्यक्तिगत एजेंडे लागू करना चाहते हैं। उन्होंने कई फैकल्टी को परेशान करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है। संघ ने कहा कि इस मामले में शिक्षा मंत्रालय की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।

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