Friday, Apr 03, 2020
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JNU हिंसा की राजनीतिक जगत ने की जमकर आलोचना, मायावती ने बताया 'शर्मनाक'

  • Updated on 1/6/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी कैंपस (JNU Campus) में रविवार को दोनों गुट लेफ्ट विंग (JNUSU) और एबीवीपी (ABVP) के बीच हुई हिंसा के बाद जहां इसके खिलाफ देश के कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर राजनीतिक पार्टियां इस घटना की कड़ी निंदा कर रही हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने जेएनयू हिंसा को अति-निंदनीय व शर्मनाक करार दिया है।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने सोमवार की सुबह ट्वीट कर कहा, "जेएनयू में छात्रों और शिक्षकों के साथ हुई हिंसा अति-निन्दनीय व शर्मनाक है। केंद्र सरकार को इस घटना को अति-गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही इस घटना की न्यायिक जांच की जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।"

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छात्र संघ की अध्यक्ष समेत 36 घायल
गौरतलब है कि रविवार शाम वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बीच जमकर मारपीट हुई। हंगामा इतना बढ़ा कि छात्र गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। लाठी डंडों और लोहे की सरिया लेकर आए करीब एक दर्जन नकाबपोश गुंडे परिसर में घुसे और उन्होंने छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष समेत प्रोफेसर सुचित्रा पर हमला किया। वहीं इस हमले में 36 से अधिक छात्र-छात्राएं घायल हो गए, जिन्हें एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो की हालत बहुत गंभीर है।  

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जेएनयू परिसर किले में तब्दील
इधर, इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने पूरे परिसर को किले में तब्दील कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर खुद न्यू दिल्ली रेंज के ज्वाइंट सीपी आनंद मोहन दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। इसके साथ ही सुरक्षा के लिए डीसीपी साउथ वेस्ट के नेतृत्व में दक्षिणी पश्चिमी और दक्षिणी जिला के करीब दर्जन भर थानों की पुलिस टीम भी यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंच गई। 

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नकाबपोश युवकों की पहचान में जुटी पुलिस
यह पुलिस टीम स्थिति को सामान्य बनाने के साथ ही उन नकाबपोश युवकों की पहचान करने में जुट गई है। इसके लिए जिला पुलिस ने आनन-फानन में एक टीम बनाई है, जो वायरल हो रहे नकाबपोशों के उस वीडियो की जांच करने में जुट गई है। उस वीडियो में गर्ल्स हॉस्टल की गैलरी में चारों ओर टूटे हुए शीशे, ईंट, पत्थर और टूटे हुए फर्नीचर के टुकड़े बिखरे हुए देखे जा सकते हैं। पहचान के लिए पुलिस टीम जेएनयू के छात्रों और प्रशासन के लोगों का भी सहारा ले रही है। देर रात तक पुलिस की ओर से शिकायत पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं किया गया था। 

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