Friday, May 07, 2021
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JNU हिंसा और CAA के खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन कर जिंदा की पुरानी परंपरा: शशि थरूर

  • Updated on 1/12/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने जेएनयू हिंसा (JNU Voilence) और  नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में देश के कई विश्वविद्यालय और कॉलेजों में हो रहे प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि जेएनयू और सीएए के खिलाफ छात्रों ने सड़क पर उतरकर पुरानी पंरपरा को जिंदा कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की पहचान एक धर्म और एक जाति के रूप में नहीं हैं, लेकिन फिर भी भारत में एकता है।

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राजनीति से दूर रहने वाले कॉलेज का साथ आना सबसे अहम
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा जेएनयू में हुई हिंसा के खिलाफ छात्र सड़क पर उतर आए। इस विरोध प्रदर्शन में राजनीति से दूर रहने वाले कॉलेज का साथ आना सबसे अहम है। 

थरूर ने आगे अपने कॉलेज समय के बारे में बताते हुए कहा कि जब मैं कॉलेज में था तब जय प्रकाश नारायण का आंदोलन चला था। मेरे सहपाठियों ने पूछा था कि क्या हम इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे, तो मैंने कहा था कि हम गैर राजनीतिक संगठन हैं, छात्र संघ के रूप में हम इस आंदोलन में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। हालांकि हम इस आंदोलन में हिस्सा लेने से किसी को नहीं रोकेंगे। 

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भारत छोड़ो आंदोलन में सेंट स्टीफेंस कॉलेज के छात्र भी शामिल हुए थे
शशि थरूर ने आगे कहा कि उस समय मेरे उत्तराधिकारी छात्र संघ अध्यक्ष ने जय प्रकाश नारायण के आंदोलन में शामिल होने का फैसला लिया था, उस समय जो छात्र कक्षाओं से निकलकर आंदोलन में शामिल हो गए, उन्होंने पुरानी परंपरा को जारी रखा।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि कॉलेज वो जगह हैं, जहां से महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था। अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन में सेंट स्टीफेंस कॉलेज के छात्र भी शामिल हुए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के लिए कॉलेजों से आवाज उठी थी।

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युवाओं के नेतृत्व की अहमियत को दिखाया गया
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि देश में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों ने परंपरागत राजनीति की सीमाओं को तोड़ दिया है और युवाओं के नेतृत्व की अहमियत को दिखाया है। छात्रों ने जो किया वो उनकी चिंता को दर्शाता है। सत्ताधारी पार्टी ने जेएनयू के विरोध प्रदर्शन को एबीवीपी का इस्तेमाल करके दबाने की कोशिश की है।

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