Thursday, Aug 18, 2022
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भारतीय दर्शन के पुरोधा थे कबीर : अर्जुन राम मेघवाल

  • Updated on 6/25/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में बैठा, एक राम का सकल पसारा, एक राम है सबसे न्यारा।  कबीर ने हमेशा राम और भारतीय संस्कृति की बात की है। उसके बावजूद उन्हें निर्गुण पंथी कहा जाता है, जबकि वे भारतीय दर्शन के पुरोधा है। कबीर ने तंदूरे के 5 तारों को हमारे शरीर की पांच इंद्रियों से जोड़ा है। उक्त बातें संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ज्योतिर्गमय कार्यक्रम के समापन समारोह में अपनी प्रस्तुति कबीर गायन के दौरान कहीं। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विदेश एवं संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी रही।
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दुर्लभ वाद्ययंत्रों का संरक्षण युवाओं की जिम्मेदारी : मीनाक्षी लेखी
मीनाक्षी लेखी ने इस दौरान कहा कि हम विथोवन को जानते हैं लेकिन भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को नहीं जानते। आजकल के शोधार्थी 200-400 साल पुराने विषयों पर शोध कर रहे हैं जबकि भारतीय संस्कृति हजारों साल पुरानी है। अब युवाओं का यह कर्तव्य है कि वह हमारी संस्कृति को बचाएं। ज्योतिर्गमय जैसे कार्यक्रम से दुर्लभ वाद्य यंत्रों को एक नई पहचान मिल रही है। अब युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे इसको संरक्षित करें। वहीं संगीत-नाटक अकादमी की अध्यक्ष उमा नंदूरी ने कहा कि ज्योतिर्गमय दुर्लभ वाद्यों को बचाने की एक पहल है। पहली बार इस तरह के कार्यक्रम आयोजन किया गया है। इस दौरान दुर्लभ वाद्य कलाकारों को सम्मानित भी किया गया।

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