Monday, Dec 09, 2019
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देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए कल खुल जाएंगे केदारधाम के कपाट

  • Updated on 5/8/2019

केदारनाथ/ब्यूरो। भगवान केदारनाथ (kedarnath dham) के कपाट वीरवार नौ मई को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस शुभ घड़ी का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से शिवभक्तों का केदारनाथ पहुंचना शुरू हो गया है। शीतकाल में खामोशी की चादर ओढ़ लेने वाली केदारपुरी अब धीरे-धीरे भक्तों के आगमन से उल्लासमय होती जा रही है।

पूरी (puri) केदारपुरी में भगवान शिव के जयकारे गूंज रहे हैं, जो पूरे माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। गौरीकुंड से रुद्रा टॉप तक थका देने वाली चढ़ाई देवदर्शनी से ही केदारपुरी के दर्शन मात्र से दूर हो रही है। उबड़ खाबड़ रास्ते जहां लोगों को परेशान कर रहे हैं, वही प्रकृति के मनमोहक दृश्य यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।

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देवदर्शनी से जैसे ही केदारनाथ मंदिर (kedarnath mandir) की ओर आगे बढ़ते हैं, चांदी सी बर्फ की परत ओढ़े मेरु-सुमेरु पर्वत शृंखला की तलहटी पर स्थित केदारपुरी की सुंदरता यहां आने वालों को अभिभूत कर रही है। इस पल को हर कोई अपने कैमरे में कैद करता हुआ दिखाई दे रहा है। केदारनाथ में अभी दो फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है। दर्जन भर रेन बसेरे टूटे हुए हैं। स्थानीय लोग और लोक निर्माण विभाग के मजदूर लगातार बर्फ हटाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों की लाइफ लाइन मानी जाने वाली चारधाम यात्रा के शुरू होने से जहां लोगों के चेहरे खेले हुए हैं, वहीं कंडी, डोली, घोडा खच्चर का काम करने वाले लोगों में उत्साह है।

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केदारनाथ में अस्त-व्यस्त व्यवस्था को पटरी पर लाना चुनौती

प्रशासन के सामने भगवान केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं पटरी पर लाना, अभी किसी चुनौती से कम नहीं है। इस बार भारी बर्फबारी से हालात बिल्कुल विकट हैं। बर्फबारी ने धाम में भारी तबाही मचाई है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के दर्जन भर हट्स धराशायी हो चुके हैं, जल संस्थान की पेयजल लाइन भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। बुधवार को केदारनाथ में विद्युत आपूर्ति शुरू हो गई, विद्युत विभाग क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक करा रहा है।

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बुधवार को दोपहर बाद मौसम खराब हो जाने से मजदूरों को काम करने में दिक्कत हो रही है। इससे व्यवस्था सुधारने में तेजी नहीं आ पा रही है। रुद्र पाइन्ट में प्रशासन ने यात्रियों के रहने के लिए अलग अलग टेंट की व्यवस्था की है। प्रशासन का दावा है कि मौजूदा समय में पांच हजार लोगों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन जिस तरह के हालात नजर आ रहे हैं, उससे प्रशासन की व्यवस्था कहीं दिख नहीं रही है।

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