Tuesday, Dec 07, 2021
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Birthday से पहले बोले कैलाश खेर- मेरी हर साँस संगीत की सेवा के लिए समर्पित

  • Updated on 7/6/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उनकी आवाज में भारतीयता की ऐसी खनक, जैसे दूर कहीं मंदिर में बजती घंटी, उनका अंदाज इतना अल्हड़, जैसे पहाड़ों से निकलती मदमस्त नदी, उनके सुर इतने खरे, जैसे आग में तपा सोना और उनकी तबीयत में ऐसी सादगी, जैसे कबीर का फक्कड़पन। हम बात कर रहे हैं दुनियाभर में अपने सूफी संगीत की सादगी बिखेरने वाले पदमश्री संगीतकार एवं गायक कैलाश खेर की। 

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बॉलीवुड में सूफी गानों से पहचान बनाने वाले कैलाश खेर का जन्म 7 जुलाई 1973 को मेरठ में हुआ था। कैलाश के पिता कश्मीरी पंडित थे और लोक गीतों में उनकी काफी रुचि थी, जिसकी वजह से कैलाश को बचपन से ही संगीत का जुनून चढ़ गया था।

 

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संगीत को अपना सब कुछ मानने वाले कैलाश का कहना है कि संगीत से उन्हें जो कुछ भी मिला है, वह उसे संगीत को वापस लौटाना चाहते हैं और इसलिए उन्होंने दो नए बैंड लॉन्च करने का निर्णय लिया है। 

उनका कहना है कि पारम्परिक संगीत को जिंदा रखना उनका धर्म और कर्म है। सात जुलाई 1973 को जन्मे कैलाश का कल 45वा जन्मदिन है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मेरी हर साँस संगीत की सेवा के ही लिए समर्पित है। 

 

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उन्होंने कहा कि हमारे देश मे संगीत केवल घरानों मे सिमट कर रह गया है। नई प्रतिभाओं के लिए कोई मंच नहीं है। सब अपने रिश्तेदारों को घराने के नाम पर आगे बड़ा रहे हैं। इसलिये मैं नई प्रतिभा को मौका देकर पारम्परिक संगीत के साथ-साथ अपनी संस्कृति को भी जिंदा रखना चाहता हूं, जो नए दौर के संगीत के आने से कहीं खोता जा रहा है।

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