Sunday, Sep 26, 2021
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कामधेनु आयोग ने किया क्लीनिकल ट्रायल में आयुर्वेद से कोरोना इलाज का दावा

  • Updated on 1/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (आरकेए) के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया ने मंगलवार को दावा किया कि देशभर के चार शहरों में किये गये क्लीनिकल परीक्षण में ‘पंचगव्य और आयुर्वेद’ उपचार के माध्यम से कोविड-19 के 800 मरीजों को ठीक किया गया। कथीरिया ने ‘गऊ विज्ञान’ पर अगले महीने आयोजित की जाने वाली पहली राष्ट्रीय परीक्षा की घोषणा करते हुए कहा कि जून और अक्टूबर 2020 के बीच राज्य सरकारों और कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की साझेदारी में राजकोट और बड़ौदा (गुजरात), वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और कल्याण (महाराष्ट्र) में 200-200 मरीजों पर ‘क्लीनिकल ट्रायल’ किये गये थे। 

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मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले आरकेए का गठन केन्द्र द्वारा फरवरी, 2019 किया गया था। कथीरिया ने पत्रकारों से कहा, ‘‘कामधेनु आयोग क्लीनिकल ट्रायल में भागीदार था... जल्द ही, हम आयुष मंत्रालय को इन परीक्षणों के डाटा सौंपने जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि उपचार की खुराक में ‘पंचगव्य’ (गोमूत्र, गाय का गोबर, दूध, घी और दही का मिश्रण), जड़ी-बूटी ‘संजीवनी बूटी’ और हर्बल मिश्रण ‘काढ़ा’ शामिल हैं। 

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उन्होंने कहा कि परीक्षण आयुष मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार किए गए थे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से संक्रमित लोग अपनी इच्छा से परीक्षणों में शामिल हुए थे और आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उन्हें संबंधित स्थानों पर मेडिकल कॉलेजों में भर्ती कराया गया, जहां परीक्षण किये गये। कथीरिया ने कहा कि उदाहरण के लिए, वाराणसी में चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस-बीएचयू) और राजकोट में आयुर्वेद क्योर कोविड केंद्र में भर्ती कोविड-19 रोगियों पर परीक्षण किए गये। 

यह पूछे जाने पर कि क्या आयुर्वेदिक उपचार एक निवारक उपाय था, उन्होंने कहा, ‘‘यह रोगनिवारक था। उन्हें कोई एलोपैथी दवा नहीं दी गई थी।’’ गौरतलब है कि भारत के औषधि नियामक ने सीरम इंस्टीट््यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक के स्वदेश में विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के देश में सीमित आपात इस्तेमाल को रविवार को मंजूरी दे दी थी।

गौ विज्ञान पर ऑनलाइन तरीके से राष्ट्रीय परीक्षा का होगा आयोजन 
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने मंगलवार को कहा कि देशी गायों और इसके फायदे के बारे में छात्रों और आम लोगों के बीच रुचि पैदा करने के लिए वह 25 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर की स्वैच्छिक ऑनलाइन गौ विज्ञान परीक्षा का आयोजन करेगा। अपनी तरह की इस पहली परीक्षा की घोषणा करते हुए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (आरकेए) के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया ने कहा कि वाॢषक तरीके से परीक्षा का आयोजन होगा। 

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बिना किसी शुल्क के कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार प्रसार परीक्षा में प्राथमिक, माध्यमिक और  कॉलेज स्तर के छात्र और आम लोग हिस्सा ले पाएंगे। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘देशी गायों के बारे में छात्रों और नागरिकों के बीच जन जागरुकता पैदा करने के लिए कामधेनु आयोग ने गौ विज्ञान पर राष्ट्रीय परीक्षा आयोजित करने का निर्णय किया है।’’ उन्होंने कहा कि आयोग गौ विज्ञान पर अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाने की तैयारी कर रहा है।

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 कथीरिया ने कहा कि परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे और आयोग की वेबसाइट पर पाठ्यक्रम के बारे में ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा। परीक्षा के नतीजों की तुरंत घोषणा कर दी जाएगी और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। होनहार उम्मीदवारों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि गाय और संबंधित मुद्दों पर पीठ और अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए विश्वविद्यालयों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले कामधेनु आयोग की स्थापना केंद्र ने फरवरी 2019 में की थी और इसका लक्ष्य गायों के संरक्षण, संवद्र्धन के लिए काम करना है।

 

 

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