Wednesday, Oct 27, 2021
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Karnal Farmers protest continues mobile internet SMS services banned till 12 pm PRSHNT

Karnal: किसानों का प्रदर्शन जारी, मोबाइल इंटरनेट-SMS सेवाओं पर रात 12 बजे तक प्रतिबंध

  • Updated on 9/9/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। करनाल में लगातार किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों का प्रदर्शन आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा के निलंबन और मृतक किसान के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर चल रहा है। करनाल में किसानों के भारी प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है और आज रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट और एसमएस सेवा पर बैन लगा दिया है। हरियाणा के गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, करनाल में किसानों के आंदोलन के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए जिले में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को निलंबित कर दिया है। यह आदेश आज रात 11:59 बजे तक प्रभावी रहेगा।

किसानों ने करनाल लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया है। दरअसल बीते बुधवार को किसानों और जिला प्रशासन के बीच बातचीत से कोई हल नहीं निकला। 

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किसान की उत्पादन लागत
बता दें कि किसानों ने बुधवार को केंद्र की ओर से बढ़ाई गई रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को नकार दिया। भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि सरकार किसानों से लूट कर रही है। किसान की उत्पादन लागत भी इस एमएसपी से नहीं निकल रही है। वहीं, एमएसपी बढ़ाए जाने को अगले साल पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है।

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महंगाई छह फीसदी बढ़ी, एमएसपी दिया सिर्फ डेढ़ फीसद: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ भद्दा मजाक कर रही है। उन्होंने बताया कि कृषि मूल्य आयोग की ओर से पिछले साल गेहूं की पैदावार लागत 1459 रुपये बताई गई थी। इस साल सरकार ने इसे घटाकर 1000 रुपये कर दिया। जबकि इस अवधि में महंगाई छह फीसद तक बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले साल के एमएसपी निर्धारण में अपनाए गए फारमूले से देखें तो भी किसानों को उनकी लागत से 71 रुपये कम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जिस एमएसपी को सरकार बड़ा कदम बता रही है, असल में वह किसानों की जेब काट रही है। उन्होंने कहा कि किसान की पैदावार की लागत कितनी पड़ रही है, सरकार चाहे तो पंतनगर, लुधियाना कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्रों से पता कर सकती है।

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