Monday, Jun 21, 2021
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मिलिए कचरे से बनाए 600 ड्रोन बनाने वाले छात्र से, 80 नाकाम कोशिशों के बाद ऐसे मिली सफलता

  • Updated on 7/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोशल मीडिया पर इन दिनों 16 साल के छात्र प्रताप चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिसका कारण हैं उनका वो आविष्कार जो कचरे से बना है और जिसने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है।

बताया जा रहा है कि प्रताप के इस आविष्कार ने उनके लिए कई बड़े अवसरों को खोल दिया है। हालांकि इसके लिए प्रताप को 80 बार नाकामियों का सामना भी करना पड़ा लेकिन अंततः प्रताप ने एक सफल आविष्कार को जन्म दिया।

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तस्वीरें लेता है ड्रोन
प्रताप के ये 600 ड्रोन एक ऐसा आविष्कार है जो ई-कचरे में बना है और ये उड़ते हुए तस्वीरें ले सकता है। प्रताप ने 14 साल की उम्र में इस आविष्कार को बनाने की ठानी थी। प्रताप मैसूर के जेएसएस कॉलेज से ग्रैजुएशन कर रहे हैं। वो 80 बार इस शुरूआत को लेकर नाकाम हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर 81 प्रयास उनका सफल रहा।

प्रताप को भी करना पड़ा संघर्ष
प्रताप ने ड्रोनतैयार कर लिया लेकिन जब उन्होंने इसके बारे में बताना शुरू किया तब उन्हें गम्भीरता से नहीं लिया गया, इसके बाद प्रताप अपने ड्रोन को लेकर आईआईटी दिल्ली पहुंचे। यहां उन्हें दूसरा पुरस्कार मिला और यही से जापान के इंटरनेशनल ड्रोन प्रतियोगिता में उन्हें भागीदारी करने का मौका मिला। इसके बाद, दिसंबर 2017 में हुई इस प्रतियोगिता में प्रताप ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।

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आगे बढे प्रताप
इसके बाद प्रताप यहीं नहीं रूके। वो आगे बढ़ते रहे और 2018 में उन्हें जर्मनी में अलबर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मेडल दिया गया। इसके अलावा उन्हें  टोक्यो की रोबोटिक्स एग्ज़िबिशन में स्वर्ण और चांदी दोनों पदक मिले हैं। बताया जाता है कि प्रताप को आईआईटी बॉम्बे में लेक्चर देने के लिए बुलाया गया था।

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प्रताप को लेकर हुए दावे
कई खबरों में कहा गया कि प्रताप को पीएम मोदी ने अपने कार्यालय आने का न्यौता दिया और उन्हें कथित रूप से डीआरडीओ में नौकरी भी मिली है लेकिन ये सच नहीं है। उन्हें पीएम कार्यालय से कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया और न ही उन्हें डीआरडीओ में जॉब मिली है।

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