Saturday, Dec 07, 2019
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कश्मीर में सेब खरीद को लेकर किसान संगठनों ने #Nafed को लिया आड़े हाथ

  • Updated on 11/18/2019

नई दिल्‍ली, टीम डिजिटल। सहकारी संस्था नेफेड के माध्यम से कश्मीर में सेब खरीदने की केंद्र की पहल बुरी तरह से विफल रही है क्योंकि उत्पादकों से सीधे तौर पर कुल 11 करोड़ सेब की पेटियों में से केवल 0.01 प्रतिशत (1.50 लाख बक्से) की खरीद ही की जा सकी है। एक किसान संगठन ने शनिवार को यह दावा किया है। घाटी में क्षेत्र के दौरे से लौटने के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने मांग की कि केंद्र को कश्मीर में सेब और अन्य बागवानी फसलों के उत्पादकों को मुआवजा प्रदान करना चाहिए, जो बेमौसम भारी बर्फबारी के साथ-साथ नव निर्मित केन्द्र शासित प्रदेश में राजनीतिक उथल पुथल के कारण परिवहन की कमी और शीत भंडारगृहों के अभाव से भारी घाटे का सामना कर रहे हैं। 

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जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत दिये गये विशेष दर्जे को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद आतंकवादियों ने सेब उत्पादकों को अपने उत्पाद बाजार में नहीं बेचने की धमकी दी थी। इस घटना के मद्देनजर केंद्र सरकार ने क्षेत्र से सेब खरीदने का फैसला किया था।

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एआईकेएससीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘सरकार ने नेफेड को खरीद-फरोख्त के लिए अधिकृत किया, लेकिन यह अभियान बुरी तरह विफल रहा। अनुभव और बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से नेफेड ने अनुमानित उपज के महज 0.01 फीसदी (11 करोड़ से अधिक बॉक्सों में से 1.36 लाख बक्से) की खरीद की है।’’    किसानों की शिकायत है कि नेफेड खरीद का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि उन्होंने कम दाम पर सेब की बिक्री बाजार में की जिसके कारण क्रय बाजार में थोक सेब की कीमतें कम हो गयीं। 

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कश्मीर देश के कुल सेब उत्पादन के 75 प्रतिशत भाग का उत्पादन करता है और कश्मीर के बागवानी उद्योग का सालाना कारोबार 10,000 करोड़ रुपये का है। किसान संगठन ने कहा, ‘‘अगर 70 फीसदी नुकसान (जैसा कि वाणिज्य और उद्योग के उत्पादकों और प्रतिनिधियों द्वारा दावा किया जा रहा है) की बात सच है, तो यह आने वाले वर्षों में कश्मीर के लोगों की आजीविका को तबाह कर देगा।’’

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किसानों की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए, एआईकेएससीसी ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने घाटी में जाकर, असमय और भारी बर्फबारी के कारण घाटी में सेब की फसल को हुए भारी नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि भारी बर्फबारी के कारण सेब उत्पादक किसानों को घर से बाहर निकलने और फसल की कटाई एवं भंडारण करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

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केसर की फसल पर भी बुरा असर पड़ा है और इस साल पैदावार कम रहने की उम्मीद है। इसमें कहा गया है, ‘‘हैरानी की बात है कि कश्मीर प्रशासन ने इसे आपदा घोषित नहीं किया है, न ही इसने नुकसान की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए अब तक कोई जमीनी सर्वेक्षण शुरु किया है।’’ इसमें कहा गया है कि बिजली की नियमित आपूर्ति, सड़क संपर्क और गांवों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी भारी चिंता के मुद्दे हैं। 

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किसानों के संगठन ने कहा कि भारी बर्फबारी के अलावा, अगस्त में तुड़ाई किये जाने वाले नाशपाती, चेरी और अंगूर जैसी फसलें, घाटी में पूरी तरह से बंद होने के कारण फंसी हुई हैं और उनका विपणन नहीं किया जा सका है, जिससे किसानों को पूरा नुकसान झेलना पड़ा है। एआईकेएससीसी ने कहा कि नतीजतन, मौजूदा सुरक्षा खतरे और ट्रकों की अनुपलब्धता के कारण परिवहन लागत लगभग दोगुनी हो गई। लगातार परिवहन अवरोधों और राजमार्गों को बंद करने से परिवहन के दौरान सेब की मात्रा और गुणवत्ता को और नुकसान हुआ और आगे भी विलंब हुआ। 

देश के करीब 250 किसान संगठनों का एक राष्ट्रव्यापी मंच एआईकेएससीसी ने सरकार से वास्तविक नुकसान का आकलन करने और सेब उत्पादकों के साथ-साथ केसर, नाशपाती, अंगूर, चेरी और भेड़ प्रजनकों को राहत देने का आग्रह किया। यह भी मांग की कि सरकार घाटी में मौजूदा सेब संकट को प्राकृतिक आपदा के रूप में केंद्रीय सहायता के लिए पात्र घोषित करे।   

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