Wednesday, Jul 24, 2019

बर्फ और ग्लेशियर के खतरों से खेलकर तय करनी होगी केदारनाथ यात्रा

  • Updated on 4/25/2019

रुद्रप्रयाग/प्रदीप सेमवाल। बाबा केदारधाम की यात्रा में इस बार यात्रियों को ग्लेशियर व हिमखंडों से गुजरकर पहुंचना होगा। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर लिंचोली-केदारनाथ तक का सात किमी. के रास्ते में ग्लेशियर अभी पिघलने शुरू नहीं हुए हैं और इस पर रोज हो रही बारिश से सर्दी बरकरार है। प्रशासन के लिए इस बार सुरक्षित यात्रा बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इस बार शीतकाल में केदारनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में 10 से 11 फीट तक बर्फबारी हुई है। रामाबाड़ा से केदारनाथ के पैदल मार्ग पर ऊपर कई अनाम चोटियां हैं जिनमें कई ग्लेशियर भी मौजूद है। रास्ते से ग्लेशियर नजर नहीं आते और ये खिसकर नीचे आते हैं तो यात्रियों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल भी प्रशासन को आगाह कर चुके हैं कि ग्लेशियर व हिमखंड केदारनाथ यात्रा में बड़ा खतरा हैं इसलिए यात्रियों को पहले से इसकी जानकारी दी जाए ताकि वे सर्तक रहे।

मार्ग में इन स्थानों पर हैं ग्लेशियर

भीमबली, रामबाड़ा, छोटी लिंचोली, बड़ी लिंचोली, रुद्राबैंड, छानी कैंप तक ग्लेशियर मौजूद हैं। इसके अलावा केदारनाथ क्षेत्र में बड़े-बड़े हिमखंड जमे हुए हैं। इसके अलावा पैदल रास्ते पर पांच से छह फीट बर्फ जमा है। प्रशासन ने हिमखंड व ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया है लेकिन ग्लेशियर व हिमखंडों में फिसलन के चलते मार्ग बेहद खतरनाक है।

घोड़े-खच्चर के बजाय पैदल जाना अधिक सुरक्षित

रामबाड़ा से केदारनाथ की दूरी करीब 13 किमी है और इस पैदल दूरी पर घोड़े-खच्चर, पालकी-डोली से भी यात्रा होती है मगर इस बार रास्ते में ग्लेशियर व हिमखंड जमा होने से घोड़े-खच्चर व पालकी-डोली से यात्रा करना जोखिम का काम हो सकता है। इसके अलावा पैदल यात्रियों को भी इससे परेशानी हो सकती है। इसलिए पैदल यात्रा ही अधिक श्रेयकर होगी।

बयान

लिंचोली से केदारनाथ तक के मार्ग पर छह फीट तक बर्फ जमा है। बर्फ व ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया है। इन रास्तों पर पुलिस के जवानों की विशेष नजर रहेगी और यात्रियों को सुरक्षित धाम तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा बर्फ को देखते हुए लिंचोली से मार्ग डायर्वट किया गया है और लिंचोली से गरुड़चट्टी यात्रियों को आवाजाही करवाई जाएगी यहां बर्फ हटाई जा रही है। रास्तों पर छह फीट तक बर्फ जमा है और मौसम बदलने से इसमें दिक्कतें आ रही हैं।

मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।

केदारनाथ पैदल यात्रा इस बार खतरों से भरी हुई है। ग्लेशियर धूप लगते ही खिसकते हैं इसलिए विशेष सर्तकता की जरूरत है। यात्रियों को लिंचोली - गरुड़चट्टी - केदारनाथ मार्ग पर आवाजाही करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में रामबाड़ा - गरुड़ चट्टी मार्ग पर बर्फ़बारी होने के बाद ग्लेशियर नहीं जमते थे, जिस कारण यह मार्ग आवजाही के लिए सुरक्षित माना जाता था लेकिन 2013 की आपदा के बाद मार्ग बदला गया है और यह मार्ग ग्लेशियर जमने से सुरक्षित नहीं है।

कर्नल अजय कोठियाल, प्राचार्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी।

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