Friday, Feb 28, 2020
kejriwal and manoj tiwari in search of hat-trick claims their respective

दिल्ली चुनावः हैट्रिक की तलाश में केजरीवाल और तिवारी,दावे अपने-अपने

  • Updated on 2/7/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) के लिये शोर- शराबे का अंत हो चुका है। साथ ही बयानवीर नेताओं के बयानबाजी भी थम गई है। दिल्ली (Delhi) के वातावरण में घुले राजनीतिक प्रदूषण के अचानक गायब होने के बाद अब साफ-सुथरी और तरोताजा हवा के लिये लोगों ने पार्कों में जाना शुरु कर दिया है। दीपावली के बाद से ही दिल्लीवासी लगातार हवा के जहरीली होने से परेशान नजर आते थे। छोटे-छोटे बच्चे भी मास्क लगाकर स्कूल जाने को विवश थे। 

Manoj tiwari with supporters


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जब प्रदूषण हटा तो चुनाव ने दी दस्तक
 फिर जल्द ही अखबारों के पहले पेज से पराली को दिल्ली के प्रदूषण के लिये जिम्मेदार ठहराने की खबरें गायब होने लगी तो दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई। फिर दिल्लीवासियों ने देखा कि पिछले 1 महीने से सभी पार्टियों में टिकट के लिये पहले मारामारी हुई। उसके बाद टिकट न मिलने से अपनी पार्टियों का दोष गिनाते-गिनाते दूसरी पार्टियों के पटका पहनने तथा वफादारी का सबूत के लिये सीधे जीत का डंका बजाते हुए देखा। 

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दिल्लीवासी 8 फरवरी को करेंगे मतदान
अब जबकि 8 फरवरी यानी कल मतदान होने है तो दिल्ली की जनता भी अपनी खामोशी तोड़ने सुबह- सुबह मतदान केंद्रों पर जाते देखे जाएंगे। उनके सामने कई स्थितियां होगी। एक तरफ केजरीवाल सरकार के पिछले 5 सालों का खाका जनता के सामने होगी तो दूसरी तरफ बीजेपी ने मोदी सरकार की उपल्बधियां को सामने रखते हुए केजरीवाल सरकार पर जबरदस्त तरीके से हमला किया है। लेकिन आप यह मत समझिये की जनता दोनों दलों के वायदे और दावों के बाद भ्रमित हो गई है।

Arvind kejriwal in a rally

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शाहीन बाग या बिजली-पानी फ्री पर लगेगा वोट
असल में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ठीक चुनाव से कुछ दिन ही पहले बिजली,पानी तथा महिलाओं के मुफ्त बस यात्रा पर जनता से वोट देने की अपील की है तो बीजेपी को भरोसा है कि शाहीन बाग एक बहुत बड़ा फैक्टर बनने जा रहा है। जिससे 20 साल का पार्टी का वनवास खत्म हो जाएगा। लेकिन इस सबके बीच एक अहम बात जो दोनों प्रतिद्वंदी दलों के बीच समान दिख रहा है कि एक तरफ अरविंद केजरीवाल को हैट्रिक लगाने का मौका मिलेगा या नहीं तो वहीं प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे है।

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जब केजरीवाल बने पहली बार सीएम

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पहली बार 2013 में सीएम बने थे, दूसरी बार 2015 में 67 सीट प्राप्त करते हुए शानदार तरीके से वापसी की। फिर 5 साल के बाद सवाल उठता है कि क्या वे हैट्रिक लगा पाएंगे या नहीं? वैसे यह हैट्रिक क्रिकेट मैच में बहुत रोमांच पैदा कर देता है। मनोज तिवारी जब दिल्ली से 2014 में पहली बार सांसद बने थे तो उन्हें भी उम्मीद नहीं होगी कि अमित शाह की पैनी नजर उनपर पड़ेगी तो वे प्रदेश अध्यक्ष जैसे पद पर सीधे बैठ जाएंगे।

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तिवारी के नेतृत्व में भी पार्टी ने जीत हासिल की
आज आलम यह है कि मनोज तिवारी भी हैट्रिक पर नजर गड़ाए हुए है। उनके नेतृत्व में पार्टी को 2017 में MCD चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल हुई। यह जीत बीजेपी के लिये बहुत बड़ी टॉनिक का काम उस समय किया था। कारण इसी MCD चुनाव से दिल्लीवासियों का अरविंद केजरीवाल से मोहभंग होना आरंभ हुआ था। वो भी महज 2 साल के भीतर-भीतर बीजेपी ने सत्ताधारी आप पार्टी को हराया था।

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लोकसभा में केजरीवाल की पार्टी का गिरा ग्राफ
फिर लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली की जनता ने बीजेपी को सातों सीटें दे दी। अरविंद केजरीवाल की पार्टी तो लोकसभा चुनाव में खिसककर तीसरे स्थान पर पहुंच गई। यानी कांग्रेस भी आप पार्टी से बेहतर प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी के जीत का सेहरा भी मनोज तिवारी के सर पर ही बंधा। 

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कांटे के मुकाबले पर केजरीवाल और तिवारी का नजर 
लेकिन अब असल मुकाबले में यदि वे केजरीवाल को मात देने में कामयाब हो जाते है तो उनका न सिर्फ कद बढ़ जाएगा बल्कि वे सीएम रेस में भी नजर आएंगे। तो वहीं आप पार्टी के जीतने पर अरविंद केजरीवाल असल हीरो बनकर उभरेंगे। मतलब साफ है कि केजरीवाल के बिजली-पानी-बस फ्री का दांव सही जगह लगा या अमित शाह को शाहीन बाग को लेकर जनता के दिलो-दिमाग में उतारने में कामयाबी मिली या नहीं-इस पर पटाक्षेप भी 11 फरवरी को हो जाएगा। 

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