Thursday, Oct 28, 2021
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kejriwal government ready to knock community transmission in delhi warned albsnt

दिल्ली में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की आशंका! केजरीवाल सरकार ने किया आगाह

  • Updated on 6/9/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) अब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की तरफ बढ़ चुका है। कम से कम दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने स्वीकार कर लिया है। अब हालात खतरे की तरफ संकेत कर रहा है। इससे पहले एम्स के डायरेक्टर ने भी आगाह किया था कि दिल्ली के कंटेनमेंट जोन में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जिसका हवाला सिसोदिया ने भी दिया है। लेकिन सवाल है कि आखिर कम्यूनिटी ट्रांसमिशन है क्या जिसका दिल्ली सरकार हरसंभव डटकर मुकाबले करने की बात करती है।

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दरअसल दिल्ली सरकार ने एक आंकड़े देकर दिल्लीवासियों को चौंका दिया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि 31 जुलाई तक सिर्फ दिल्ली में साढ़े 5 लाख कोरोना पॉजिटिव केस हो सकते है। जबकि 30 जून तक ही 1 लाख संक्रमितों की संख्या को पार कर जाएगी। वहीं 15 जुलाई तक 2 लाख केस दिल्ली में हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई तक हमें 80 हजार बेड की व्यवस्था करनी होगी। जिसके बाद दिल्ली के आबोहबा में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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बता दें कि कोरोना वायरस के इस थर्ड स्टेज में यह पता लगाना मुश्किल होगा कि किसे,कब और कहां कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया है। सबसे बड़ी बात कम्यूनिटी ट्रांसमिशन के चपेट में आने वाला व्यक्ति न तो विदेश से हाल में लौटा है और न ही किसी संक्रमित के संपर्क में आया है। इसके वाबजूद वो व्यक्ति पॉजिटिव हुआ है। इसे ही कम्यूनिटी ट्रांसमिशन कहा जाता है। जो देश और दिल्ली में दस्तक देने के लिये तैयार है। हालांकि केंद्र सरकार के 25 मार्च से ही अंतराष्ट्रीय उड़ान पर पाबंदी लागू कर दी है,जिससे विदेशों से लौटे व्यक्ति के संपर्क में आने का अब सवाल ही नहीं उठता है। वहीं जो व्यक्ति अपने घरों पर लंबे समय से कैद रहा है, वो किसी पॉजिटिव के सीधे संपर्क में नहीं आया इसके बाद भी संक्रमित हो रहा है तो यह चिंता पैदा करती है।
 

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मालूम हो कि लोकल ट्रांसमिशन भारत में तो हुआ है, जब कोई किसी विदेश से लौटे व्यक्ति के संपर्क में आ गया और संक्रमित भी हुआ है। देश में ज्यादातर केस अभी तक लोकल ट्रांसमिशन की ही है। इस लोकल ट्रांसमिशन में वैसे व्यक्तियों को ट्रेस करना आसान होता है जिसके संपर्क में कोई स्वस्थ व्यक्ति के आने के बाद वो पॉजिटिव हो गया। उसकी पहचान सुनिश्चित करना बेहद आसान है। लेकिन कम्यूनिटी ट्रांसमिशन में यह पता लगाना बहुत कठिन है कि जो व्यक्ति किसी के संपर्क में ही नहीं आया और पॉजिटिव हुआ है। तो फिर कैसे पॉजिटिव हुआ इस पर कुछ भी कहना कठिन है। जिसका खतरा अब दिल्ली को भुगतना पड़ सकता है।

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