Wednesday, Jun 16, 2021
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khalistani isi connection in the toolkit case sohsnt

टूलकिट मामले में खालिस्तानी-आईएसआई कनेक्शन, भजन सिंह और पीटर फ्रेडरिक का नाम आया सामने

  • Updated on 2/16/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी के दिन हुई हिंसा के साथ-साथ टूलकिट मामले (Toolkit Case) की जांच भी तेज कर दी है, जिसके चलते आए दिन नए और चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सोमवार को जांच के दौरान आईएसआई से जुड़े भजन सिंह भिंडर उर्फ इकबाल चौधरी और पीटर फ्रेडरिक के नाम सामने आए हैं। पीटर फेड्रीक खालिस्तानी समर्थक है और टूलकिट मामले में रिसोर्स पर्सन यही है। 

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आईएसआई- खालिस्तानी कनेक्शन आया सामने
आईएसआई से भी उसके तार जुड़े हुए हैं। साल 2006 से भारत की सुरक्षा एजेंसियां इसकी तलाश में जुटी हुई हैं। इस  समय वह भारत के खिलाफ इन्फो वॉर और प्रोपेगंडा चला रहा है। वह सिख इन्फॉर्मेशन सेंटर से जुड़ा है, जो खालिस्तानी मूवमेंट चलाता है। वहीं दूसरी ओर भींडर खालिस्तानी समर्थक भी है। उसका दावा है कि वह मूलरूप से मलेशिया का है और अमेरिका से काम करता है। टूलकिट को फैलाने के मामले में दिशा रवि की गिरफ्तारी तो हो गई है, लेकिन निकिता और शांतनु जो मुख्य रूप से इससे जुड़े थे वह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। 

करीब 70 लोगों ने दिया साजिश को अंजाम
बता दें कि पुलिस ने निकिता के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिया है। इसके अलावा करीब 70 लोग हैं, जो टूलकिट के माध्यम से पूरी साजिश को अंजाम देने में शामिल रहे। इन सभी ने जूम मीटिंग एप के जरिए ये पूरी साजिश प्लान की थी। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने टूलकिट मामसे में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। 

दिल्ली पुलिस ने किये कई खुलासे
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के साथ मुंबई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु ने किसानों के आंदोलन के संबंधित 'टूलकिट' बनाई थी और भारत की छवि को धूमिल करने के लिए उसे अन्य लोगों के साथ साझा किया था। पुलिस ने दावा किया कि बेंगलुरु से शनिवार को गिरफ्तार की गई दिशा रवि ने जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को टेलीग्राम ऐप के जरिये 'टूलकिट' भेजी थी और उस पर कार्रवाई करने के लिए उसे राजी किया था। पुलिस ने बताया कि डाटा भी हटा दिया गया था। दिशा के टेलीग्राम खाते से पता चलता है कि 'टूलकिट' से संबंधित कई लिंक हटाए गए थे।

भारत में विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की साजिश
पुलिस ने बताया कि शांतनु महाराष्ट्र के बीड जिले का एक निवासी है और वह पुणे से इंजीनियरिंग कर रहा है। 'टूलकिट' को कुछ आलोचकों द्वारा भारत में विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की उसकी साजिश के 'सबूत' के रूप में उद्धृत किया गया है। इस महीने की शुरुआत में, साइबर सेल ने 'टूलकिट' के 'खालिस्तानी समर्थक' निर्माताओं के खिलाफ 'भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध' छेडने के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की थी। उन पर आपराधिक साजिश, राजद्रोह और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने दावा किया कि निकिता और शांतनु ने ‘खालिस्तान समर्थक समूह’ पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीएफजे) द्वारा ऑनलाइन जूम ऐप के माध्यम से आयोजित एक बैठक में भाग लिया और कहा कि जैकब भी 'टूलकिट’’ दस्तावेज बनाने वालों में से एक था। 

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