Tuesday, May 17, 2022
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किसान क्रांति यात्रा: किस तरह किसानों और पुलिस के बीच 24 घंटे हुआ संघर्ष, देखें Pics

  • Updated on 10/3/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  हरिद्वार से उठी किसान क्रांति आखिरकार दिल्ली के किसान घाट पहुंचकर खत्म हो गई। मंगलवार को दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाला था। हालांकि देर रात किसानों को दिल्ली  में प्रवेश करने की अनुमति दे दी गई। 

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पुलिस के तीन हजार जवान तैनात किए गए थे ताकि किसान दिल्ली यूपी बॉर्डर से आगे ना बढ़ सकें। हालांकि पुलिस एक्शन पर जवाब यहीं दिया गया कि भीड़ को मैनेज करने के लिए जो न्यूनतम फोर्स की जरूरत थी उसी का इस्तेमाल किया गया है। 

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अफसोस की बात ये है कि पुलिस और किसानों की झड़प उस दिन हुई जब राष्टपिता और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती थी। किसानों को साथ ऐसी बेदर्दी दिखाने को लेकर मामला बढ़ गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के हिंसा में बदलने से उनके भी 7 जवान घायल हो गए। 

बता दें कि मंगलवार देर रात हजारों किसान किसान घाट पहुंचे और चौधरी चरण सिंह की समाधि पर फूल चढ़ाकर इस यात्रा को खत्म कर दिया। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि किसान घाट पर फूल चढ़ाकर हम अपना आंदोलन खत्म कर रहे हैं। टिकैन ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये सरकार किसान विरोधी है और हमारी कोई मांग पूरी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि अब आंदोलनकारी किसान अपने-अपने घर वापस जा रहा है। 

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किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली से उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई रास्ते बंद कर दिए गए थे। किसान कर्ज माफी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने इस यात्रा का आह्वान किया।

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 पुलिस ने बताया कि दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जाने या आने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डीएनडी फ्लाईओवर, अप्सरा बॉर्डर, जीटी रोड, विकास मार्ग पर यातायात बाधित रहा। हालांकि पुलिस ने कहा कि गांधी जयंती की छुट्टी की वजह से हालांत काबू में रहे। 

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बता दें कि दिल्ली में प्रवेश करने के रोके जाने पर किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। सरकार ने किसानों की कुछ मांगों पर सहमति बनाीई थी और कुछ पर सहमति जताई थी और कुछ के लिए समय मांगा था। हालांकि बाद में किसानों ने अपनी मांगो के संबेध में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन पर भी भरोसा करने से इनकार कर दिया। 

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Navodayatimesइस मामले पर ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) का कहना है कि दिल्ली उत्तर प्रदेश सीमा पर किसानों के शांतिपूर्ण विरोध मार्च को रोकने के लिए गांधी जयंती पर पुलिस की कार्रवाई बबर्तापूर्ण थी और उनकी मांगो पर विचार करने का केंद्र का आश्वासन ‘झांसा’ लगता है। 

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