Sunday, Jan 23, 2022
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अयोध्या विवाद: जानें, तीन मिनट में 3 महीने के लिए सुनवाई टालने वाले SC के ये जज हैं कौन

  • Updated on 10/29/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 460 साल पुराने आयोध्या मामले पर आज पहली बार चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुनवाई और अब इस मामले पर अगली तारीख जनवरी 2019 तय की गई है। महज तीन मिनट के लिए कोर्ट में ये सुनवाई हुई और तीन मिनट के अंदर मामले को तीन महीने के लिए टाल दिया गया।  

आज की सुनवाई में विवादित भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर होनी थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि ये मामला इस तरह से अर्जेंट में नहीं सुना जा सकता है। चीफ जस्टिस गोगोई के साथ इस फैसले में दो जज और शामिल थे। चलिए जानते है आखिर ये जज है कौन।

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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
दीपक मिश्रा के बाद देश के चीफ जस्टिस बने रंज गोगोई सुप्रीम कोर्ट में जज रहने से पहले पंजाब उच्च न्यायालय में चीफ जस्टिस रह चुके हैं। अक्टूबर 2018 में उन्हें भारत के जीफ जस्टिस का पद दिया गया था। वे भारत के पूर्वोत्तर से इस पद को बनाए रखने वाले पहले न्यायाधीश हैं। साल 1978 में रंजन गोगोई ने गौहती हाईकोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की जिसके बाद साल 2001 मरें उन्हें स्थायी न्यायाधीश बना दिया गया था। इसके बाद साल 2010 में उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। साल 2011 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।

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कौन है जस्टिस एसके कौल 
राम मंदिर विवाद पर सुनवाई करने वाले तीसरे जज है एसके कौल। एसके कौल का जन्म 26 दिसंबर 1958 में हुआ था। 1982 में दिल्ली होईकोर्ट से एलएलबी की डिग्री ली  साल 1982 में दिल्ली होईकोर्ट में उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद दिसंबर 1999 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्त बनाया गया। साल 2001 में कौल दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज बने और 2003 में चीफ जस्टिस बन गए। सितंबर साल 2012 तक वो दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रबे। इसके बाद वो एक साल तक पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। जुलाई साल 2014 में उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया। 

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इस वजह से सुर्खियों में आए थे जस्टिस के.एम जोसेफ
गौरतलब है कि जस्टिस के.एम जोसेफ वही जज हैं जिन्‍होंने साल 2016 में उत्‍तराखंड में हरीश रावत की सरकार के दौरान राष्‍ट्रपति शासन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को अमान्‍य घोषित कर दिया था। जस्टिस जोसेफ ने अपने फैसले में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के निर्णय को गलत करार दिया था। जिसके बाद से ही केंद्र की बीजेपी सरकार उनसे नाराज बताई जा रही थी।

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