Tuesday, Sep 25, 2018

ऋषि पंचमी 2018: अनजानें में हुए पापों से पाना चाहते हैं मुक्ति तो करें ये व्रत

  • Updated on 9/14/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ऋषि पंचमी का त्योहार 14 सितंबर यानी आज है। इस त्योहार को भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। कहा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत सभी वर्ग की स्त्रियों को करना चाहिए। भाद्रपद शुक्ल पंचमी को सप्त ऋषि पूजन व्रत का विधान है।

इस व्रत में किसी देवी-देवता की पूजा नहीं की जाती, बल्कि इस दिन विशेष रूप से सप्त ऋर्षियों का पूजन किया जाता है। महिलाओं की माहवारी के दौरान अनजाने में हुई धार्मिक गलतियों और उससे मिलने वाले दोषों से रक्षा करने के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है। 

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इस दिन गंगा स्नान का भी महत्व है। इस दिन बिना जुती हुई भूमि से उत्पन्न फल आदि का भोजन करना चाहिए। ऋषि पंचमी को भाई पंचमी नाम से भी जाना जाता है। माहेश्वरी समाज में राखी इसी दिन बांधी जाती है। महिलाएं इस दिन सप्त ऋषि का आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख शांति एवं समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं। 

पूजा विधि
घर में साफ-सफाई करके पूरे विदि विदान से सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करती है। सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प अक्षत आदि से पूजा करके उनसे क्षमा याचा कर सप्तऋषियों की पूजा की जाती है। पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुना जाता है तथा पंडितों को भोजन करवाकर कर व्रत का उघापन किया जाता है।

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व्रत फल
पूरे विधि-विधान से सप्तऋषियों की पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते है। अविवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत बेहद महत्वपूर्ण और फलकारी  माना जाता है। इस दिन हल से जोते हुए अनाज अर्थात जमीन से उगने वाले अन्न ग्रहण नहीं किए जाते हैं। 

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व्रत कैसे करें

  • सुबह किसी नदी आदि पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • उसके बाद घर में ही किसी पवित्र स्थान पर पृथ्वी को शुद्ध करके हल्दी से चौकोर मंडल बनाए। फिर उस पर सप्त ऋषियों की स्थापना करें।
  • इसके बाद गंध,पुष्प,धूप, दीप, नेवैघ आदि से सप्तऋषियों को पूजन करें।
  • तत्पश्चात निम्न मंत्र से अर्घ्य दें।

'कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः.
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
दहन्तु पापं मे सर्वं गृह्नणन्त्वर्घ्यं नमो नमः॥

 

  • अब व्रत कथा सुनकर आरती कर प्रसाद वितरित करें।
  • बिना बोई हुई भोजन का आहार लें।
  • इस प्रकार सात वर्ष तक व्रत करके आठवें वर्ष में सप्त ऋषियों की सोने की सात मूर्तियां बनवाएं।
  • तत्पश्चात कलश स्थापन करके यथाविधि पूजन करें।
  • अंत में सात गोदान तथा सात युग्मक-ब्राह्मण को भोजन करा कर उनका विसर्जन करें।

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