Friday, Jan 18, 2019

खबर का हुआ ऐसा असर कि रातों-रात बदल गई जनता की राय, जानें कैसे शास्त्री बने प्रधानमंत्री

  • Updated on 1/11/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।   27 मई 1964 देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के निधन को महज कुछ ही घंटे बीते थे। दूसरी ओर राजनीतिक हलचल पल- पल तेज हो रही थी सब सवाल कर रहे थे कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। इसी बीच दो नाम सामने आ रहे थे पहला मोरारजी देसाई और लाल बहादुर शास्त्री। 

जब पत्रकार जानना चाहते थे कि मोरारजी क्या चाहते है
इसी बीच पत्रकार कुलदीप नैयर पहुंचे मोरारजी देसाई के घर। दरअसल नो जानना चाहते थे कि प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी के बारे में मोरारजी क्या कहना चाहते है। हालांकि नैयर मोरारजी देसाई से मिलने में कामयाब तो नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने उनके समर्थकों से मुलाकात की उनके समर्थकों ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि मोरारजी मैदान में उतरेंगे और बहुत ही आसानी से जीतेंगे भी। 

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मोरारजी के बेटे ने कहा लाल बहादुर ना करे मुकाबला
बता दें कि नैयर लाल बहादुर शास्त्री के सूचना अधिकारी भी रह चुके थे। उनके बेटे ने उनसे कहा कि अपने शास्त्री से बोल दो की मुकाबला ना करें। इस बात का जिक्र खुद मोरारजी ने अपनी बॉयोपिक 'बियॉन्ड द लाइन्स'  में किया है। 

शास्त्री जी की थी ये राय
नैयर शास्त्री से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे। उन्होंने शास्त्री जी से बात करना शुरु किया इसके बाद शास्त्री जी ने कहा कि वो सबकी सहमति के पक्ष में है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी तरफ से दो नाम सुझाए जयप्रकाश नारायण और इंदिरा गांधी। इतनी ही नहीं शास्त्री जी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर चुनाव होता है तो वो जयप्रकाश नारायण से मुकाबला करने के लिए तैयार है और वो जीत भी सकते हैं लेकिन इगर इंदिरा गांधी से मुकाबला करना हो तब उनका जीतना थोड़ा मुश्किल हैं। 

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शास्त्री के सुझाव को जब मोरारजी ने किया खारिज
इसके बाद नैयर एक बार फिर मोरारजी के घर पहुंचे। उन्होंने मोरारजी को बताया कि शास्त्री ने कुछ नाम सुझाए थे। इसके बाद मोरारजी ने जयप्रकाश नाराण को भ्रमित शख्स और इंदिरा गांधी को छोटी सी लड़की बताया था। उन्होंने कहा कि इस मुकाबले को रोकने का एक ही तरीका है कि पार्टी (कांग्रेस) उन्हें ही नेता के रुप में स्वीकार कर ले।  

कांग्रेस अध्यक्ष कामराज भी थे मोरारजी के पक्ष में 
तब कांग्रेस के अध्यक्ष थे कामराज, कामराज तब पार्टी के लोगों की राय जानने में लगे थे कि आखिर पार्टी के लोग क्या चाहते है। हालांकि कामराज खुद शास्त्रीजी के समर्थन में थे वो नहीं चाहते थे कि मोरारजी को प्रधानमंत्री बनाया जाए। 

खबरों में आया ये सामने 
तब न्यूज एजेंसी पर नैयर ने एक खबर चलाई जिसमें लिखा कि प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने अपनी दावेदारी का ऐलान कर दिया है। माना जाता है कि उन्होंने अपने सहयोगी से कहा है कि वे इस पद के उम्मीदवार हैं बिना विभाग वाले मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को एक और उम्मीदवार माना जा रहा है। हालांकि वो खुद कुछ नहीं बोल रहे। 

आखिर इस तरह शास्त्री जी बन गए देश के दूसरे प्रधानमंत्री 
नैयर के मुताबिक, ये खबर का कुछ ऐसा असर हुआ कि लोगों को लगने लगा मोरारजी बहुत महत्वकांक्षी है उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहर लाल नेहरु की चिता की आग ठंड़ी होने तक का इंतजार नहीं किया। मोरारजी के समर्थकों का कहना था कि खबर की वजह से 100 वोटों का घाटा हुआ था। हालांकि इसके बाद नैयर ने कहा कि उनका ऐसा कोई मकसद नहीं था कि इससे किसी को फायदा का नुकसान पहुंचे। 

जब कामराज ने नैयर को कहा थैंक्यू
इस खबर का जो जोरदार असर हुआ था उसके बारे में उन्हें तब समझ में आया जब संसद भवन में सीढ़ियों से उतरते वक्त  उनके कान में कहा थैंक्यू। इसके बाद कामराज ने ऐलान करते हुए कहा कि सर्वसम्मति में शास्त्री के पक्ष में हैं और इस तरह लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता आसान हो गया और वो देश के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए। 

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