Saturday, Mar 23, 2019

जानिए, भगवान शिव ने क्यों दिया था नंदी को अमर रहने का वरदान

  • Updated on 3/4/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देवों में देव महादेव यानी भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए हर सफल प्रयास करते हैं जिससे खुश होकर महादेव भी अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं भेजते। 

हम जब भी किसी शिवालय में जाते हैं को वहां एक और चीज शिवलिंग के बिल्कुल सामने पाते हैं और वो है नंदी का विराजित होना। सिर्फ यहीं नहीं लोग जब भी कोई इंसान शिवालय जाता है तो वह नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहता है, लेकिन सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। चलिए आपको इस प्रसंग के बारे में बताते हैं।

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दरअसल, मान्यता है कि जहां भी शिवालय होता है वहां नंदी विराजित होते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि नंदी शिव जी के परम भक्त हैं साथ ही वह  भगवान शिव के वाहन भी हैं। नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहना एक तरह की परंपरा या कहे की मान्यता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीलाद मुनि ने ब्रह्मचार्य का पालन करते हुए तप में जीने का फैसला किया था। इससे वंश समाप्त होते देख उनके पिता चिंतित हो गए।

उन्होंने अपने पुत्र श्रीलाद मुनि से वंश को आगे बढ़ाने को कहा, लेकिन वे गृहस्थ आश्रम को अपनाना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने भगवान शिव को तप से खुश कर जन्म और मृत्यु के बंधन से हीन पुत्र का वरदान मांगा। 

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भगवान शिव ने श्रीलाद को पुत्र रुप में प्रकट होने का वरदान दिया। कुछ समय बाद भूमि जोतते समय श्रीलाद को एक बालक मिला, जिसका नाम उन्होंने नंदी रखा।

अब नंदी को बड़ा होते देख भगवान शिव ने मित्र और वरुण नाम के दो मुनि श्रीलाद के आश्रम में भेजे, जिन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि नंदी अल्पायु है।

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जब ये बात नंदी को मालूम हुई तो वे महादेव की अराधना से मृत्यु को जीतने के लिए जंगल में चले गए, जहां उन्होंने शिव का ध्यान आरंभ किया। उनकी तप से प्रसन्न होकर शिव जी ने नंदी को वरदान दिया कि वत्स तुम मृत्यु और भय से मुक्त अजर और अमर है। 

इसके बाद भगवान शिव ने वेदों के समक्ष गणों के अधिपति के रुप में नंदी का अभिषेक करवाया, जिसके बाद नंदी हो गए नंदेश्वर। भगवान शिव ने नंदी को वरदान दिया कि जहां उनका निवास होगा वहीं नंदी भी विराजमान होंगे। 

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