Thursday, Dec 12, 2019
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जानिए, क्यों एक बच्चे के कारण भगवान शिव को छोड़ना पड़ा बद्रीनाथ

  • Updated on 2/23/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिंदू धर्म में चार धाम की यात्राओं का अलग महत्व है। इनमें यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल है। इन चार धामों में से एक बद्रीनाथ उत्तराखण्ड राज्य में स्थित अलकनंदी नदी के किनारे है।

इस धाम को लेकर लोगों के बीच मान्यता है कि यहां पहले माता पार्वती और शिव जी का वास हुआ करता था, लेकिन एक बालक के कारण उन्हें इस जगह को छोड़ केदारनाथ का रुख करना पड़ा। पौराणिक ग्रन्थों में आई कथा ते अनुसार जानते हैं यह प्रसंग।

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पुराणों में दर्ज कथा के अनुसार सतयुग के दौरान जब भगवान श्री नारायण बद्रीनाथ आए तब यहां बद्रियों बेर का वन था। यहां भगवान शिव माता पार्वती के साथ आनंदपूर्वक रहते थे। माना जाता है कि एक दिन श्रीहरि विष्णु बालक का रुप धारण कर रोने लगे, जिसकी आवाज सुनकर माता पार्वती सोचने लगी कि आखिर इस वन में यह कौन बालक रो रहा है? 

माता पार्वती को उस बालक पर दया आ गई, जिसके चलते वह उसे अपने घर ले आईं। यह देख भगवान शिव तुरंत समझ गए कि ये श्री हरि विष्णु की लीला है। उन्होंने माता पार्वती से बालक को घर से बाहर छोड़ने को कहा लेकिन वह नहीं मानी और उस बालक को घर लाकर सुलाने लगी। 

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कुछ देर बाद जब बालक सो गया तो माता पार्वती और शिव जी दोनों साथ में कुछ दूर घूमने चले गए। कहते है बालक के भेष में आए भगवान विष्णु को इसी मौके का इंतजार था। उन्होंने तुरंत घर का दरवाजा अदंर से बंद कर लिया। जब भगवान शिव और माता पार्वती वापस लौटे तो उन्हें  घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला।

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जब उन दोनों ने बालक से दरवाजा खोलने को कहा तब अंदर से भगवान विष्णु ने कहा कि अब आप ये जगह भूल जाइए, मुझे ये पसंद आ गया है। मुझे यहीं विश्राम करने दिजिए। आप केदारनाथ चले जाइए। कहते हैं कि तब से लेकर आज तक बद्रीनाथ यहां पर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, साथ ही भगवान शिव केदारनाथ में दर्शन दे रहे हैं।


 

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