Thursday, Jan 20, 2022
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जाने क्या मिलेगा सर्दी में चिडिय़ाघर के जानवरों को खाने में खास

  • Updated on 10/25/2021

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। बारिश ने अचानक दिल्ली के मौसम का रूख बदल दिया है। जहां लोगों ने अपने गर्म कपड़े निकालने शुरू कर दिए हैं सर्दी से निपटने के लिए अन्य इंतजाम कर रहे हैं। ऐसे में दिल्ली चिडिय़ाघर प्रशासन अपने जानवरों को कैसे भूल सकता है। इसीलिए मांसाहारी, शाकाहारी जानवरों के साथ पक्षियों व सरीसृपों के लिए विशेष प्रबंध सर्दियों के मौसम में चिडिय़ाघर प्रशासन ने करना शुरू कर दिया है।
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जलवायु को ध्यान में रखते हुए होगा 92 प्रजातियों का रख-रखाव
मालूम हो कि दिल्ली चिडिय़ाघर में करीब 92 प्रजातियों के जानवर हैं। जिनके प्राकृतिक आवास का सभी बंदोबस्त प्रशासन की ओर से किया जाता है। चाहे वो पानी हो, खाना हो या फिर दवाएं। जलवायु को ध्यान में रखते हुए चिडिय़ाघर प्रशासन द्वारा ग्रीष्मकालीन, शीतकालीन व वर्षाकालीन व्यवस्थाएं समय-समय पर परिवर्तित की जाती हैं ताकि उन्हें किसी भी मौसम के चलते कोई परेशानी ना हो। इसी क्रम में सर्दियों के महीनों नवंबर से फरवरी तक जानवरों के लिए कई व्यवस्थाएं जुटाने में चिडिय़ाघर प्रशासन लग गया है।   हालांकि हो सकता है कि आप चिडिय़ाघर जाएं तो आपको सरीसृपों को देखने का मौका ना मिले क्योंकि डॉक्टरों व एक्सपर्ट द्वारा वैज्ञानिक आधार पर उन्हें प्रबंधित किया जा सकता है।
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शीतकालीन आहार
--सभी मांसाहारी स्तनधारियों के लिए मांस की मात्रा में 20 फीसदी की वृद्धि की गई है।
--उल्लू सहित अन्य लाइव फीड लेने वाले जानवरों-पक्षियों के आहार की संख्या को 25 फीसदी तक बढ़ाया गया है। 
--पेंटेड स्टॉर्क व पेलिकन के लिए मछलियों की मात्रा में 20 फीसदी की वृद्धि की गई है।
--सभी शाकाहारी स्तनधारियों को आंवला और पौष्टिक शीतकालीन सब्जियां प्रदान की जाएंगी व उनके शरीर के अनुपात में आधा किलोग्राम अधिक सब्जियां मिलेंगी।
--गायों, गैंडों और हाथियों के लिए 1 किलोग्राम प्रतिदिन प्रदान किया जाएगा।
--हाथियों को प्रतिदिन 150 किलोग्राम गन्न मिलेगा। 
--तोते, कॉकटू के लिए हरी मटर व कॉकटेल और पैराकेट्स को एक पाव चीकू और चुकंदर दिया जाएगा जबकि भालू को 100-500 ग्राम।
--ठंड से बचाने के लिए हिरणों और मृगों को धान की पुआल की व्यवस्था होगी।
--शेर, बाघ, तेंदुआ सहित बड़े मांसाहारियों को लकड़ी का मंच उपलब्ध करवाया जाएगा।
--सभी मांसाहारियों व सरीसृपों के लिए हीटर की व्यवस्था की जाएगी।
--मगरमच्छों के भोजन के साथ ही नदी की रेत उपलब्ध कराई जाएगी व बिस्तर के लिए धान की भूसी दी जाएगी।
--सांपों व पायथन को छिपने के लिए धान की भूसी सिर्फ एक बार दी जाएगी।
 

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