Wednesday, Oct 23, 2019
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तमिलनाडु के इस गांव में होती है किन्नरों की शादी, अगले ही दिन हो जाती है विधवा

  • Updated on 6/24/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। किन्नर (Transgender) का नाम लेते ही हमारे दिमाग में उनके लिए एक अपवीत्र छवी बनने लग जाती है। वैसे तो किन्नर थर्ड जेंडर में आते हैं। लेकिन आज भी उन्हें समाज (Society) में वो दर्जा नहीं दिया जाता है जिसके वो पात्र है। मगर कड़ी मेहनत और कुछ संगठनों की मदद से किन्नर अपने लिए एक सुंदर जीवन का निर्माण करने की कोशिश रहे हैं।

लेकिन पौराणिक कथाओं (Mythological Stories) के मुताबिक किन्नरों को एक अलग और दिव्य स्थान दिया गया है। जहां सबके रिती रिवाज अलग होते हैं वहीं किन्नरों के रिती रिवाज (Rituals) काफी अलग और हटकर होते हैं। ऐसा ही एक रिवाज है तमिलनाडु (Tamil Nadu) के इस गांव में जहां आज भी एक ऐसा त्योहार (Festival) मनाया जाता है जिसमें सभी किन्नर बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। बता दें कि, तमिलनाडु के विल्लीपुरम के कूवागम गांव (Koovagam Village) में भगवान आरवन के लिए एक विशेष त्यौहार होता है जिसमें सभी किन्नर उनसे विवाह करती हैं और उसके बाद अगले दिन ही विधवा हो जाती हैं।

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पौरणिक कथाओं में मान्यता

ये कहानी एक पौराणिक कथा से शुरू होती हैं जहां महाभारत के युद्ध से पहले एक भविष्यवाणी हुई थी की वे ये युद्ध हार जाएंगे। पांडव इस भविष्यवाणी से चिंतीत होकर ज्योतिषी के पास जाते हैं जहां ज्योतिषी उन्हें काली मां के सामने एक आदमी की बली देने को कहता है। और मुश्किल यही थी की उन्हें किसी एक ऐसे आदमी की बली देनी थी जो सर्वगुण संपन्न हो। धर्मर्या को इसकी चिंता होने लगी क्योंकि वहां सबमें सिर्फ़ तीन ही महान लोग ऐसे थे जिनकी बली दी जा सकती थी जिसमें कृष्णा, अर्जुन और अरावन शामिल थे।

जब भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन और अरावन में से किसी एक को देनी थी बली

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महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) और महान योद्धा अर्जुन (Arjun) की बली नहीं दी जा सकती थी क्योंकि ये दोनों महाभारत (Mahabharat) के मुख्य कड़ी थे। इसलिए भगवान अरावन (Lord Aaravan) ही बचे थे जिन्हें अपने प्राण त्याग महाभारत में पांडव (Pandavas) के युद्ध को जीताना था। अरावन अपनी बली देने के लिए खुशी खुशी राजी हो गए थे लेकिन इस बीच उन्होंने एक शर्त रखी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि वे मरने से पहले शादी करना चाहते हैं और उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान कृष्ण मोहिनी (Mohini) रूप में अवतार लेकर आए जिसके बाद अरावन की शादी हुई और अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई।

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तमिलनाडु के कुवागम में किन्नरों की होती है भगवान अरावन से शादी

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तभी से ही ये प्रथा चली आ रही है इस पर्व को किन्नर करीब 18 दिनों तक मनाते हैं और अरावन की कोतांडवार के रूप में पूजा करते हैं। यहां सभी किन्नर सज-धज कर मोहिनी रूप में तैयार होती हैं और भगवान अरावन को अपने पति के रूप में चुनती हैं, जहां पंडित उन्हें एक धार्मिक रक्षा धागा बांधता है।

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महज एक दिन में किन्नर भगवान अरावन से शादी रचाते हैं और प्रथा के मुताबिक अगले ही दिन अरावन की मृत्यु के बाद सभी किन्नर विधवा हो जाते हैं। विधवा ट्रॅान्स्जेंडर्स सफ़ेद साड़ी पहन कर 10 दिनों तक लोगों की सेवा करते हैं। कुवागम का ये त्योहार किन्नरों (Transgender Festivals) के लिए बहुत ही बड़ा पर्व माना जाता है और इस त्योहार को मनाने के लिए किन्नर यहां दूर-दूर से आते हैं।

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