Thursday, Jun 24, 2021
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उन्नाव मामला : High Court ने दिया सेंगर को झटका, सजा निलंबित करने से इंकार

  • Updated on 1/17/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भाजपा के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh sengar) को शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court) से कोई राहत नहीं मिली और अदालत ने उन्नाव में 2017 में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में उसे सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने से इंकार कर दिया। अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ सेंगर की याचिका पर अदालत (Court) ने पीड़िता से जवाब भी मांगा है।       
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सजा या जुर्माने की राशि नहीं कम होगी
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल (Sangeeta dhingara sehgal) की पीठ ने सेंगर को जुर्माने की 25 लाख रुपए की राशि 60 दिन में देने की अनुमति दी जिनमें से 10 लाख रुपए बिना किसी शर्त के पीड़िता को दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसका विचार सेंगर की सजा या जुर्माने की रकम निलंबित करने का नहीं है क्योंकि वह अन्य मामलों में भी अभियोजन का सामना कर रहा है। इसके बाद उसके वकील ने सजा निलंबित करने की मांग करने वाली याचिका वापस ले ली।      
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पीड़ित के साथ हुए कई हादसे
पीठ ने कहा कि इस मामले में पीड़ित (Victim) के साथ कई हादसे हो चुके हैं। मामले के तथ्यों को देखते हुए हम सजा को निलंबित करने के इच्छुक नहीं हैं। आपको 10 लाख रूपये पीड़ित को देने हैं और इसके लिए कोई शर्त नहीं हो सकती। पीठ ने कहा, आपको रिहा नहीं किया जा सकता है क्योंकि आपके खिलाफ अन्य मामले भी हैं जिसमें सुनवाई चल रही है। सुनवाई अदालत का फैसला आपके खिलाफ है, आप आज दोषी हैं, आपको हिरासत में होना चाहिए, आप केवल डेढ़ साल से जेल में हैं। हम सजा को निलंबित नहीं कर रहे हैं। सेंगर के वकील ने दावा किया कि जुर्माना (Penalty) देने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है और उसकी विवाहयोग्य दो बेटियां हैं। ऐसे में 25 लाख रुपये जुटाने में उसे दिक्कत आ रही है और निचली अदालत ने रकम जमा करने के लिए 20 जनवरी (January) तक ही वक्त दिया है।     
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क्या बोले CBI के वकील
वकील ने अदालत से रकम जमा करने की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया। सीबीआई (CBI) के वकील ने कहा कि सेंगर की पत्नी भी लोक सेवक हैं और सेंगर को पहले 10 लाख रुपये का भुगतान करना चाहिए जैसा निचली अदालत ने निर्देश दिया है और बाकी के 15 लाख रुपये अदालत में जमा किए जाने हैं। मामले में अगली सुनवाई अब चार मई (may) को होगी और अदालत ने अपील को नियमित मामलों’की श्रेणी में रखा है।

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