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राम गंगा तट पर हुआ लोक गायक कार्की का अंतिम संस्कार, उमड़ा हुजूम, बाजार रहे बंद

  • Updated on 6/10/2018

देहरादून/पिथौरागढ़/ ब्यूरो। कुमाऊं के जाने-माने लोक गायक पप्पू कार्की का शव रविवार की सुबह जब सेलागांव स्थित उनके घर पहुंचा, तो पूरे गांव में मातम पसर गया। पप्पू का अंतिम संस्कार रामगंगा तट पर किया गया, जहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। 34 वर्षीय लोकगायक की हादसे में हुई मौत के चलते पूरे क्षेत्र के बाजार बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोक गायक कार्की की मौत की खबर सुनने के बाद से ही पप्पू की मां, पत्नी सहित उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। कार्की की मां और पत्नी कई बार बेसुध हो गईं। परिजन और दोस्त-रिश्तेदार कार्की के शव से लिपटकर रोते बिलखते रहे।

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बीते रोज हैड़ाखान रोड में हुई कार दुर्घटना में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक पप्पू कार्की की मौत हो गई थी। कार्की ने 1998 में पहली ऑडियो कैसेट ‘फौज की नौकरी’ रिलीज की थी। इसके बाद लोक गायकी के क्षेत्र में उनके कदम रुके नहीं। युवा लोकगायक ने कम समय में जाने-माने चार अवार्ड भी जीते थे।
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कुमाऊंनी में गाए गए उनके गीतों ने देश ही नहीं, विदेशों में भी धूम मचाई थी। कार्की अपने पीछे मॉं, पत्नी और एक छोटा बेटा छोड़ गए हैं। पप्पू का अंतिम संस्कार थल में रामगंगा नदी के तट पर किया गया। सभी ने नम आंखों से अपने अजीज लोकगायक को अंतिम विदाई दी। पप्पू कार्की की मौत से उत्तराखंड का सांस्कृतिक जगत स्तब्ध है।
 

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