Sunday, Apr 18, 2021
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ladakh deadlock 9th round of talks held after about two and a half months pragnt

लद्दाख गतिरोध: करीब ढाई महीने बाद 9वें दौर की वार्ता, सैनिकों को पीछे हटाने पर हुई चर्चा

  • Updated on 1/25/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद भारत (India) और चीन (China) की सेनाओं ने रविवार को कोर कमांडर स्तर की नौवें दौर की वार्ता की। इसका उद्देश्य पूर्वी लद्दाख (Ladakh) में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ना है।

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करीब ढाई महीने बाद हुई 9वें दौर की वार्ता
सूत्रों ने बताया कि उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के चीन की ओर स्थित मोल्दो सीमावर्ती क्षेत्र में पूर्वाह्न दस बजे शुरू हुई थी। इससे पहले, छह नवंबर को हुई आठवें दौर की वार्ता में दोनों पक्षों ने टकराव वाले खास स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने पर व्यापक चर्चा की थी। वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन कर रहे हैं।

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युद्ध की तैयारियों में 50 हजार जवान
भारत लगातार यह कहता आ रहा है कि पर्वतीय क्षेत्र में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तनाव को कम करने की जिम्मेदारी चीन की है। पूर्वी लद्दाख में विभिन्न पवर्तीय क्षेत्रों में भारतीय थल सेना के कम से कम 50,000 जवान युद्ध की तैयारियों के साथ अभी तैनात हैं। दरअसल, गतिरोध के हल के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता में कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा है। अधिकारियों के अनुसार चीन ने भी इतनी ही संख्या में अपने सैनिकों को तैनात किया है।

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वार्ता में नहीं निकला कोई ठोस नतीजा
पिछले महीने भारत और चीन ने भारत-चीन सीमा मामलों पर 'परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र' (डब्ल्यूएमसीसी) ढांचा के तहत एक और दौर की राजनयिक वार्ता की थी, लेकिन इस वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। छठें दौर की सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चों पर और सैनिक नहीं भेजने, जमीनी स्थिति में बदलाव करने के एकतरफा प्रयास नहीं करने तथा विषयों को और अधिक जटिल बनाने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने सहित कई फैसलों की घोषणा की थी।  

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हाल में आई थी ये बड़ी खबर
दोनों देशों के बीच ये बैठक ऐसे दौर में होने जा रही है जब हाल ही में चीन द्वारा भारत के अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की सीमा के अंदर गांव बसा लेने की खबरें आई थी। खबर मिली थी इस गांव को त्सारी चू गांव के अंदर बसाया गया है। यह गांव अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित है। चीन का यह गांव भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार बनाए गए इस गांव में करीब 101 घर भी बनाए गए हैं। यह गांव अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक भारतीय सीमा के करीब 4.5 किमी अंदर स्थित है।

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चीन ने रखी अपनी बात
चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश में गांव बनाने का निर्माण करने की खबरों पर चीन की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वो 'अपनी जमीन पर' निर्माण का काम कर रहा है और यह पूरी तरह से चीन की अखंडता का मामला है। मीडिया के सामने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 'भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर या फिर जंगनान प्रांत (दक्षिण तिब्बत) में चीन की कंडीशन क्लियर और काफी स्ट्रांग है।

उन्होंने साफ करते हुए कहा कि हमने चीनी जमीन पर अवैध रूप से बसाए गए 'अरुणाचल प्रदेश' को कभी मान्यता नहीं दी है।'  इस बारे में चीनी विदेश मंत्रालय ने की वेबसाइट पर कहा गया है कि ‘हमारे खुद के क्षेत्र में चीन का सामान्य निर्माण पूरी तरह संप्रभुता का मामला है।'

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