Friday, Jan 21, 2022
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lala lajpat rai birth anniversary

जानें, क्यों देश के शेर लाला लाजपत राय को कहा जाता था पंजाब केसरी

  • Updated on 1/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  पंजाब के शेर और ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले  मुख्य क्रांतिकारियों में से एक लाला लाजपत राय की आज जयंती है। लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को फिरोजपुर पंजाब में हुआ था। लाला लाजपत राय पंजाब केसरी के नाम से भी विख्यात थे। लाला लाजपत राय ने बहुत से क्रांतिकारियों को प्रभावित किया उन्हीं में से एक थे भगत सिंह। वर्ष 1928 में साइमन कमीशन के विरुध प्रदर्शन के दौरान लाठी-चार्ज में बुरी तरह घायल होने के बाद 17 नवंबर वर्ष 1928 में उनका निधन हो गया। 

क्यों लाला लाजपत राय को कहा जाता था पंजाब केसरी 

दरअसल जब भी वो बोलते थे तो केसरी की ही तरह उनका स्वर गूंजता था। जिस प्रकार केसरी की दहाड़ से वन्यजीव डर जाते हैं, उसी प्रकार से लाला लाजपत राय की गर्जना से अंग्रेज सरकार कांप उठती थी। 

लाला लाजपत राय का जीवन  

उनके पिता मुंशी राधा कृष्ण आजाद फारसी और उर्दू के महान विद्वान थे। उनकी माता गुलाब देवी धार्मीक प्रवृत्ति की महिला थीं। 1884 में उनके पिता का रोहतक ट्रांसफर हो गया और वो भी पिता के साथ रहने के लिए आ गए। 1877 में राधा देवी से उनकी शादी हुई। 

शिक्षा 

उनके पिता राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रेवाड़ी में शिक्षक थे। वहीं से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा हासिल की।  1880 में उन्होंने लॉ की पढ़ाई के लिए लाहौर स्थित सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। 1886 में उनका परिवार हिसार आ गया यहीं उन्होंने लॉ की प्रैक्टिस की। 1888 और 1889 के नैशनल कांग्रेस के वार्षिक सत्रों के दैरान उन्होंने प्रतिनिधि के तौर पर हिस्सा लिया। हाईकोर्ट में वकालत करने के लिए 1892 में वो लाहौर चले गए। 

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राजनीतिक जीवन 

वर्ष 1885 में उन्होंने सरकारी कॉलेज से द्वितीय श्रेणी में वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की और हिसार में अपनी वकालत शुरू कर दी। वकालत के अलावा लालाजी ने दयानन्द कॉलेज के लिए धन एकत्र किया, आर्य समाज के कार्यों और कांग्रेस की गतिविधियों में भाग लिया। वह हिसार नगर पालिका के सदस्य और सचिव चुने गए। वह 1892 में लाहौर चले गए।

लाला लाजपत राय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं में से एक थे। लाल-बाल-पाल इस तिकड़ी का हिस्सा थे। बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल इस तिकड़ी के दूरसे दो सदस्य थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में नरम दल (जिसका नेतृत्व पहले गोपाल कृष्ण गोखले ने किया) का विरोध करने के लिए गरम दल का गठन किया।

लालाजी ने बंगाल के विभाजन के खिलाफ हो रहे आंदोलन में भी हिस्सा लिया। उन्होंने सुरेंद्र नाथ बैनर्जी बिपिन चंद्र पाल और अरविन्द घोष के साथ मिलकर स्वदेशी के सशक्त अभियान के लिए बंगाल और देश के दूसरे हिस्से में लोगों को एकजुट किया। 

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जब लाला जी को किया गिरफ्तार 

3 मई 1907 को रावलपिंड़ी में अशांति पैदा करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और मांडले जेल में 6 महीने रखने के बाद 11 नवंबर 1907 को रिहा किया गया। 

1914 में लाला जी चले गए थे ब्रिटेन 

स्वतंत्रता संग्राम ने एक क्रांतिकारी रुप ले लिया था। लालजी चाहते थे कि भारत की वास्तविक परिस्थिति का प्रचार दूसरे देशों में भी किया जाए इसलिए वो 1914 में ब्रिटेन चले गए थे। इसी समय प्रथम विश्व युद्ध छिड गया जिसके कारण वो भारत नहीं लौट पाए और इसके बाद वो भारत के लिए समर्थन इक्ट्ठा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र चले गए। 

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लाला जी की लिखी किताबों को प्रकाशित होने से पहले ही कर दिया था बैन 

उन्होंने इंडियन होम लीग ऑफ़ अमेरिका की स्थापना की और “यंग इंडिया” नामक एक पुस्तक लिखी। पुस्तक के द्वारा उन्होंने भारत में ब्रिटिश शासन को लेकर गंभीर आरोप लगाये और इसलिए इसे ब्रिटेन और भारत में प्रकाशित होने से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया। 1920 में विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ही वह भारत लौट पाये।

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