Wednesday, Jan 19, 2022
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लालू प्रसाद बोले- पूँजीपरस्त ‘मोदी सरकार’ ने अविश्वास पैदा किया, नीतीश बचाव में उतरे

  • Updated on 11/19/2021


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत केन्द्र सरकार पर पूँजीपरस्त होने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि किसानों को आतंकवादी और देशद्रोही बताकर उन्होंने बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में अविश्वास पैदा किया है। विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बाद लालू ने ट््वीट किया, ‘‘विश्व के सबसे लंबे, शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई। यह किसानों, मकादूरों, गऱीबों और मेहनतकश लोगों की जीत है। यह लोकतंत्र, संविधान और देश की जीत है।’’ 

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लालू ने आरोप लगाया, ‘‘पूँजीपरस्त अहंकारी सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, आढ़तिए, चंद लोग, देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में अविश्वास पैदा किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से। बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।’’ 

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प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार की सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए 2020 सितंबर में बनाए गए तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन कानूनों को निरस्त करने की संवैधानिक प्रक्रिया संसद के शीतकालीन सत्र में पूरी कर ली जाएगी। इन कृषि कानूनों के खिलाफ नवंबर 2020 से ही राजधानी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसान आंदोलन कर रहे हैं।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने संबंधी घोषणा पर शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में बहुत ही स्पष्टता के साथ अपनी बातें रख दी हैं और उनका इसमें कुछ $खास बोलने का कोई औचित्य नहीं है। कुमार ने नई दिल्ली प्रवास से वापसी के बाद पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून बनाये थे। यह केंद्र सरकार का निर्णय था। आज प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ही संसद के अगले सत्र में इसे वापस लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने बहुत ही स्पष्टता के साथ अपनी बातें रख दी हैं।’’ 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्होंने किसानों के हित में ये तीनों कृषि कानून परित किये थे लेकिन वह लोगों को इस संबंध में समझा नहीं पाए और इसलिए इन कानूनों को वापस लिया जा रहा है। कुमार ने कहा कि इसमें कुछ खास बोलने का अब कोई औचित्य नहीं है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कृषि कानून वापस लिए जाने संबंधी सवाल पर कुमार ने कहा, ‘‘इसके बारे में कौन क्या बोलता है, मालूम नहीं। सब अपनी-अपनी बातें बोलते रहते हैं लेकिन आज तीनों कृषि कानूनों के बारे में प्रधानमंत्री ने स्वयं अपनी बातें रख दी हैं। सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। विपक्ष को भी अपनी बातें रखने का अधिकार है।’’ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के जातीय जनगणना के वक्तव्य पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने क्या कहा हमें मालूम नहीं है। उनसे अभी हमारी कोई बातचीत नहीं होती है।’’ 

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उन्होने कहा, ‘‘जातीय जनगणना को लेकर उनकी पार्टी के नेता और उनके (लालू प्रसाद) पुत्र तेजस्वी यादव समेत अन्य दूसरे लोगों ने हमसे मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री से भी हम लोगों ने इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। जातीय जनगणना के मुद्दे पर केन्द्र ने निर्णय स्पष्ट कर दिया है। इसके बाद हम लोगों ने भी बहुत साफ-साफ कह दिया है कि आपस में हम सब बैठक कर इस पर निर्णय लेंगे।’’ कुमार ने कहा, ‘‘तेजस्वी यादव ने जो चिट्ठी लिखी थी, वह उनकी पार्टी की तरफ से आयी हुई है और वह चि_ी रखी हुई है। हम सब एक साथ सर्वसम्मति से इस पर निर्णय लेंगे।’’     

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