Wednesday, Apr 14, 2021
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कृषि कानूनों पर स्टे के बाद विरोध करने वाले वकील ने चीफ जस्टिस को बताया साक्षात भगवान

  • Updated on 1/12/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 48 दिनों से लगातार चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) के बीच आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के कार्यन्वयन पर रोक लगा दी है। कोर्ट के फैसले के बाद कानूनों का विरोध कर रहे वकील एमएल शर्मा (ML Sharma) ने चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े (SA Bobde) की तारीफों के कसीदे पढ़ डाले। लगातार कृषि कानूनों का विरोध कर रहे वकील ने कोर्ट के आदेश के बाद चीफ जस्टिस को साक्षात भगवान बता दिया। 

बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के नए कृषि सुधार कानूनों पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही इस कानून से संबंधित विवाद को हल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक कमेटी के गठन का भी निर्देश दिया है जो संबंधित पक्षों के विवादित मामलों की सुनवाई करेगी।   

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कोर्ट ने केंद्र को लगाई थी फटकार
इससे पहले, केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है। उसने किसानों के प्रदर्शन पर कहा, हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।

CJI ने जताई थी नाराजगी
प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है।

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किसानों की मांग पूरी तरह रद्द हो कानून
वहीं सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगने के बाद किसानों ने खुशी तो जाहिर की थी लेकिन ये भी साफ कर दिया था कि वो किसी भी प्रकार की कमेटी के सामने उपस्थित नहीं होंगे। साथ ही कानूनों पर स्टे नहीं पूरी तरह से रद्द करने पर ही अपना आंदोलन खत्म करेंगे। 

सोमवार को अदालत की कार्यवाही के कुछ ही घंटे बाद, कृषि यूनियनों के एक संयुक्त मंच, संयुक्ता किसान मोर्चा ने एक बयान जारी किया, जिसमें लिखा था कि हमारे वकील ने सूचित कर दिया है कि सरकार के अड़ियल रवैये के कारण हम सर्वसम्मति से सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किसी भी समिति के समक्ष जाने के लिए सहमत नहीं हैं। इसके साथ ही आंदोलरत किसानों ने एख सुर में कहा है कि कानून रद्द होने के अलावा वो किसी भी और बात पर राजी नहीं होंगे।

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