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जानें आजकल क्यों हैं गुलाम रसूल चर्चा में, भारत- चीन विवाद से क्या है रिश्ता?

  • Updated on 6/17/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और चीन के बीच तनाव का केंद्र रहे गालवान घाटी एक बार फिर से चर्चा में है।दरअसल लद्दाख में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी भारत के लिये रणनीतिक क्षेत्र के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण है। लेकिन चीन इस पूरे क्षेत्र पर हमेशा से दावा ठोंकती रही है। जिस कारण ही 62  का युद्ध भी लड़ा गया।

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खैर यह गालवान घाटी अक्साई चीन का एक ईलाका है। लेकिन इस घाटी का नाम एक गुलाम रसूल गलवां नामक चरवाहे के नाम पर पड़ी है। जो नई जगह खोजने के लिये हमेशा से उत्सुक रहते थे। जिस कारण उन्होंने ही पहली बार इस जगह पर कदम रखे थे। गुलाम रसूल का जन्म 1878 में हुआ था। वे जल्द ही अंग्रेजों के लिये गाइड काम करने लगे।

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गुलाम रसूल लद्दाख के कई गुमनाम इलाके की खोज में जुट गए। उनके जुनुन को देखते हुए  एडवेंचर ट्रेवलर सर फ्रांसिस यंगहसबैंड ने अपनी कंपनी में नौकरी पर रख ली। अंग्रेजों से संपर्क बढ़ी तो गुलाम रसूल भी अंग्रेजी भाषा लिखने और बोलने लगा। जिसके बाद उन्होंने 'सर्वेंट ऑफ साहिब्स' नामक किताब लिखी। जिसमें उन्होंने इस घाटी को लेकर कई बातों का जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने उस समय के ब्रिटिश भारत और चीन के बारे में भी लिखा है।   

 

 

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