Monday, Nov 18, 2019
Legislative Assembly Election Who will put the stamp on the people of Kashmir card and bad economy

विधानसभा चुनावः कश्मीर कार्ड और खराब इकॉनामी में से जनता किस पर लगाएगी मोहर?

  • Updated on 10/16/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। महाराष्ट्र (Maharashtra) और हरियाणा (Haryana) में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार अपने चरम पर है। इन दोनों राज्यों में बीजेपी (Bjp) के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने किले को न सिर्फ बचाने की है बल्कि फिर से बहुमत से सरकार बनाने की भी है। इसके साथ ही मोदी-शाह के जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) से धारा 370 हटाने को लेकर जनता का क्या रुख होता है उसकी भी एक तरह से परीक्षा होने वाली है। देश की इकॉनामी के खस्ताहाल होने की अटकलों के बीच पीएमसी घोटाले ने जरुर बीजेपी की धड़कन बढ़ा दी है। यानी पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के लोकसभा में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद यह पहला चुनाव है जो उनके पिछले 5 महीनों में लिये गए फटाफट फैसले का भी एक तरह लिटमस टेस्ट लेगा। इसकी भी हमें अनदेखी नहीं करनी चाहिये।

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बीजेपी की प्रतिष्ठा हैं दांव पर
हालांकि जब महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिये तारिख की घोषणा की गई तो तभी से यह चर्चा तेज थी कि बीजेपी धारा 370 को बड़ा राजनीतिक मुद्दा के तौर पर प्रचारित करने जा रही है। इसका मतलब यह था कि चुनाव कहीं का हो लेकिन कश्मीर कार्ड ही आखिरकार चलेगा। यह भी तय है कि यदि दोनों राज्यों के चुनाव बीजेपी के पक्ष में आती है तो दिल्ली और झाड़खंड के आगामी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी कश्मीर कार्ड के सहारे ही सेहरा बांधने की तैयारी शुरु कर देगी। लेकिन अगर महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी के खिलाफ चुनाव परिणाम होते है तो निश्चित रुप से मोदी सरकार के लिये बहुत बड़ा झटका होगा।

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कांग्रेस के पास खोने के लिये कुछ भी नहीं
यह बिल्कुल साफ है कि बीजेपी को जीत दिलायेगी तो कश्मीर कार्ड और यदि हार का मुंह देखना पड़ा तो खराब इकॉनामी को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस के पास दोनों राज्यों में खोने के लिये कुछ भी नहीं है तो पाने के लिये बहुत कुछ है। एक बार फिर राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर लोगों से किये वायदा पूरा नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया है। जिस पर बीजेपी और मोदी दोनों खामोश है। राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि चांद पर भेजने से पहले लोगों को भरपेट खाना देने की गारंटी भी मोदी सरकार को देनी चाहिये। और यह तभी संभव होगा जब लोगों के पास रोजगार होंगे। उनका इशारा साफ तौर पर देश की इकॉनामी को लेकर था। 

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पीएमसी घोटाला बनी मोदी सरकार के लिये सरदर्दी
यह बात भी सही है कि पीएम नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आनन-फानन में कई सुधार के कदम उठाये। जिसका असर देखने के लिये अभी इंतजार करना पड़ेगा। जब यह लग रहा था कि लोगों का भरोसा बाजार में फिर से बहाल हो रहा है तभी पीएमसी घोटाला ने मोदी सरकार की सभी कवायद पर पानी फेर देने का ही काम किया है। इसलिये जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मुंबई पहुंची तो पीएमसी के ग्राहकों ने उनका घैराव भी किया। दरअसल पीएमसी बेंक में जमा पूंजी के सुरक्षित होने को लेकर जो लोगों के मन में शंका पैदा हुई उसे भरोसा देने में भी पूरी तरह मोदी सरकार नाकाम रही है। जिसका असर यह हुआ है कि दो पीएमसी ग्राहक की मौत अब तक हो चुकी है।

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कमजोर कांग्रेस और अतिविश्वासी बीजेपी में है मुकाबला
पीएम नरेंद्र मोदी औऱ गृह मंत्री अमित शाह अगर अपने चुनाव प्रचार में कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर इतने मुखर है तो उन्हें पीएमसी ग्राहकों के भी विश्वास को जीतने के लिये कुछ शब्द खर्च करने चाहिये था। जो अब तक नहीं हुआ है। यह सही है कि बीजेपी को फिर से उसी कमजोर विपक्षी पार्टी कांग्रेस से सीधा मुकाबला है जिसे लोकसभा में धूल चटा दिया था। कांग्रेस दोनों राज्यों में फिर से आंतरिक कलह और भीतरघात से ही परेशान दिख रही है। मोदी-शाह की चतुराई भरी राजनीति का वैसे तो मुकाबला भारतीय राजनीति में नहीं दिख रहा है। कांग्रेस का कोई भी नेता तो दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। इस समय कांग्रेस से उम्मीद करना भी बैमानी होगा जो बीजेपी को टक्कर भी दे सकती है। फिर से गैंद जनता जनार्दन के ही पाले में है कि अतिविश्वासी बीजेपी को सत्ता सौंपेगी या कमजोर कांग्रेस को फिर से ऑक्सीजन देकर जिंदा करेगी। इसके लिये 24 अक्टूबर तक इंतजार करना पड़ेगा।    
   
 

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