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पंजाब की तरह हिमाचल व हरियाणा में भी नशों के सेवन में भारी वृद्धि

  • Updated on 6/19/2019

पंजाब, हरियाणा और हिमाचल में जहां कभी दूध और घी की नदियां बहा करती थीं, वहीं आज ये तीनों राज्य बुरी तरह शराब के दरिया और अन्य नशों की दलदल में धंसते जा रहे हैं। 
पंजाब में तो युवा पहले ही बड़े पैमाने पर नशे की लत का शिकार हो चुके थे, पिछले कुछ समय के दौरान हिमाचल के युवाओं में भी नशों की लत बढ़ गई है और यही हाल अब हरियाणा का हो रहा है। 
हाल ही में रोहतक के पी.जी.आई.एम.एस. स्थित ‘राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र’ (एस.डी.डी.टी.सी.) में इलाज करवाने के लिए आने वाले नशेडिय़ों की संख्या में हुई भारी वृद्धि यह संकेत दे रही है कि हरियाणा बड़ी तेजी से शराब और अन्य नशों की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। 
इसका प्रमाण यह है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान यहां शराब और अन्य नशों से मुक्ति के लिए इलाज करवाने राज्यभर से आने वाले रोगियों की संख्या में 10 गुणा वृद्धि हो गई है। 
वर्ष 2009 में यहां इलाज के लिए 573 रोगी आए जबकि 2018 में इनकी संख्या बढ़ कर 5824 हो गई। यही नहीं इस वर्ष 1 जनवरी से 31 मई तक यहां 3641 रोगी आ चुके हैं जिसका सीधा-सा मतलब है कि वर्ष 2019 के अंत तक यहां आने वाले रोगियों की संख्या 2018 से अधिक होगी।  
बेशक इन तीनों राज्यों में नशा ज्यादातर पाकिस्तान से ही आता है परन्तु इन्हें फैलाने वाले तो हमारे अपने ही लोग हैं जिनमें पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा कुछ अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। 
इसका प्रमाण हाल ही में पंजाब में नशों और भ्रष्टïाचार के आरोपों में संलिप्त एक महिला थानेदार सहित 6 थानेदारों और 5 अन्य पुलिस कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त किए जाने से मिलता है। 
उक्त तथ्यों के दृष्टिïगत समय की मांग है कि नशों का प्रचलन बढऩे से रोक कर युवा पीढ़ी को नष्टï होने से बचाने की अत्यधिक आवश्यकता है। ऐसा नशों की सप्लाई लाइन तोड़ कर व नशे के धंधे में शामिल सभी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई तथा नशों का कारोबार रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने से ही संभव है।   —विजय कुमार

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