Tuesday, Jun 28, 2022
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दुक्कड़ की बारीकियों सहित मुख वीणा की धुन में मग्न हुए श्रोता

  • Updated on 6/23/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। ज्योतिर्गमय कार्यक्रम में सिर्फ दुर्लभ यंत्रों की धुन ही नहीं बल्कि उसे बनाने की कला भी कलाकारों द्वारा सिखाई जा रही है। विश्व संगीत दिवस पर संगीत-नाटक अकादमी द्वारा 25 जून तक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर से आए कलाकार दुर्लभ वाद्यों की प्रस्तुति दे रहे हैं। गुरूवार को मंगल प्रसाद ने ललित कला गैलरी में भारत के शास्त्रीय और दुर्लभ पारंपरिक वाद्ययंत्र दुक्कड़ को बनाना सिखाया। जोकि एक तत वाद्य है और इसका उपयोग शहनाई के साथ संगत के रूप में किया जाता है। इसमें स्याही अंदर की ओर लगाई जाती है। वहीं आलोक बिशोई के धुंपा वाद्य ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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पखावज व रावणहत्था बजाकर कलाकारों ने बटोरी वाह-वाही
एम. लिंगराज ने जैसे ही मुख वीणा की धुन बजाई तो श्रोता मग्न हो गए। इस दौरान अयोध्या से आई कौशिकी झा ने पखावज पर अपनी कलाकारी दिखाई और राजू बरोट ने रावणहत्था जैसे दुर्लभ वाद्ययंत्र की प्रस्तुति देकर खूब वाह-वाही बंटोरी। जितेंद्र कुमार चौरसिया ने नागडिय़ा, आदिल खान ने सारंगी, मनोज कुमार प्रजापत ने अलगोजा व रमेश कुमार कोहली ने मशक बीन जैसे दुर्लभ वाद्य यंत्रों को बजाकर भारत की लोक परंपराओं से रूबरू करवाया। वहीं नन्हें घासी व उनके दल ने गुदुम बाजा बजाया और राजीव दास ने असम की अनुष्ठानिक कला मनसा यंत्र, सौरवब्रत चक्रवर्ती ने सुरबहार व रबी रतन साहू ने आदि धुन और मैहर बैंड ने संगीत वाद्यों के समूह की प्रस्तुति देकर लोगों का दिल जीत लिया। 

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