Monday, Oct 25, 2021
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lo ji, now why politics started in the name of emperor, were gujjars or kshatriyas

क्यों शुरू हुई नोएडा में राजनीति, सम्राट को लेकर गुर्जर बनाम क्षत्रिय

  • Updated on 9/18/2021

नई दिल्ली/ दिनेश शर्मा। दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में सम्राट को लेकर राजनीति शुरू हो गई। सम्राट कोई और नहीं गुर्जरों का अभिमान कहे जाने वाले राजा मिहिर भोज है। अब सम्राट मिहिर भोज को लेकर अब नया विवाद शुरू हुआ है। सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे या क्षत्रिय इसको लेकर अब गुर्जर बनाम क्षत्रिय की जंग को हवा दी जा रही है। क्षत्रियों के संगठन करणी सेना व राजपूत उत्थान संगठन क्षत्रिय बताते हुए अपना सम्राट बताया है। अचानक शुरू हुई इस राजनीति को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दो दिवसीय दौरे से जोड़ कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री को दादरी क्षेत्र में सम्राट मिहिर भोज की विशाल प्रतिमा का अनावरण करना है। इस प्रतिमा अनावरण का कार्यक्रम दादरी विधायक तेजपाल नागर ने रखा है। जिसके बहाने वह पिछले दो सालों से विरोधियों द्वारा उनकी छवि खराब कर इस बार विधानसभा का टिकट काटे जाने की चर्चा का विस्तार किया जा रहा है।

इस विस्तार को रोकने के लिए प्रतिमा अनावरण के बहाने अपनी क्षेत्र में धमक और जनता के बीच अपनी लोकप्रियता दिखाने का प्रयास विधायक तेजपाल नागर करेंगे वहीं विरोधी उनके इन मंसूबों में पलीता लगाने के लिए गुर्जर सम्राट मिहिर भोज को क्षत्रिय बताते हुए गुर्जर सम्राट लिखे जाने का विरोध कर क्षत्रिय संगठनों को आगे कर मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक पत्राचार शुरू कर चुके है। ताकि मुख्यमंत्री को मूति अनावरण कार्यक्रम में आने से रोका जा सके।  

वहीं भाजपा के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा नेतृत्व अलीगढ़ में जाट राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास के बाद पश्चिमी उप्र में नाराज चल रहे गुर्जरों को गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के बहाने साधने का प्रयास कर रही है। 

 क्यों शुरू हुई गुर्जर बनाम क्षत्रिय की राजनीति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 21-22 सितंबर को गौतमबुद्ध नगर में कार्यक्रम है। इसी दौरान 22 सितंबर को वह ग्रेटर नोएडा के दादरी कस्बे में रहेंगे। दादरी विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के विधायक तेजपाल सिंह नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री गुर्जर शासक मिहिर भोज की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद से ही राजपूत समुदाय विरोध जता रहा है। क्षत्रिय संगठनों का कहना है कि सीएम योगी तुष्टिकरण और गुर्जर वोट के लिए क्षत्रियों की भावनाएं आहत कर रहे हैं। राजपूतों के पूर्वज राजा मिहिर भोज को गुर्जर समुदाय का बताकर उनकी ऐतिहासिक पहचान को मिटा रहे हैं।

जेवर विधायक ठाकुर धीरेन्द्र सिंह से मिला प्रतिनिधि मंडल
राजपूत करणी सेना और राजपूत उत्थान सभा ने भी सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर कहे जाने पर आपत्ति जताई है। उत्थान सभा के यूपी के अध्यक्ष धीरज सिंह रावत और करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर के नेतृत्व में वीरवार को एक दल ने जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह से भेंट कर मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। दोनों संगठनों ने कहा है कि सीएम आदित्यनाथ इस प्रतिमा का अनावरण करने न आएं।

राजपुत उत्थान सभा का कहना है कि, दादरी में अनावरण होने वाली प्रतिमा पर मिहिर भोज के नाम से पहले गुर्जर शब्द का प्रयोग किया गया है। जबकि वह प्रतिहार राजपूत वंश के प्रतापी शासक थे। उन्हें गुर्जर जाति से इस प्रकार जोड़ा जाना गलत है। यह इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। मालूम हो कि वह नौंवी शताब्दी के राजपूत राजा मिहिर भोज प्रतिहार की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक गुर्जर समुदाय उन्हें अपना पूर्वज बता रहा है। भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के राजपूतों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ को लेकर क्षत्रिय समाज पहले से ही नाराज है।

गुर्जर नहीं  हिंदू हृदय सम्राट कहे तो कोई आपत्ति नहीं
राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर ने का दावा है कि सम्राट मिहिर भोज के क्षत्रिय राजा होने के सारे साक्ष्य है। जिसे मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा जा चुका है। यहां तक कि राजा के मौजूदा पीढ़ी के लोगों की लिस्ट भी उन्हें सौंपी गई है। ऑडियो, वीडियो, एएसाई रिकॉर्डिंग और ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह साबित होता है कि मिहिर भोज क्षत्रिय शासक थे। इसीलिए उनके नाम के आगे गुर्जर लिखा जाना आपत्तिजनक है। अगर उत्तर प्रदेश सरकार उनकी प्रतिमा का अनावरण करना चाहती है, तो गुर्जर के बजाय हिंदू हृदय सम्राट लिखकर कर सकती है। लेकिन गुर्जर लिखना उनकी पहचान के साथ छेड़छाड़ है। उनके मौजूदा वंशजों ने कहा है कि अगर सरकार उनके पूर्वज को राजपूत शासक नहीं मानेगी, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

मुख्यमंत्री ने किया अनावरण को दर्ज करायेंगे विरोध
 भाजपा सरकार गुर्जर समाज को राजनीतिक दृष्टि से लुभाने के लिए जातिवाद का खेल खेल रही है। इससे राजपूत समाज में रोष व्याप्त है। यदि कार्यक्रम में बिना बदलाव के मुख्यमंत्री इस प्रतिमा का अनावरण करेंगे, तो राजपूत समाज विशाल आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की होगी। राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजपूत भाजपा का बहिष्कार करेंगे। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह भारतीय जनता पार्टी को अपने कोर वोटर से हाथ धोना पड़ सकता है। 

इतिहासकार भी एक मत नहीं, गुर्जर- प्रतिहार वंश के राजा थे मिहिर भोज
एएसआई के रिटायर्ड अफसर और प्राचीन भारत के इतिहासवेत्ता भगवान सिंह का दावा है कि सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार राजपूत राजा थे। उनके वंशज प्रतिहार राजपूत हैं। अरब हमलावरों से मिले दस्तावेजों के मुताबिक वह रणक्षेत्र में अदम्य साहस दिखाते थे। मिहिर भोज ने हमलावरों को लगातार भारत में प्रवेश से रोका था। कई वर्षों तक वह भारतवर्ष की रक्षा करते रहे। उनका शासन मुख्यत: गुजरात में था।

इसी वजह से उन्हें गुर्जर-प्रतिहार वंश के नाम से जाना गया।  वहीं कुछ इतिहासकारों के मुताबिक गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य ने दस्युओं, डकैतों, इराकी,मंगोलो , तुर्कों अरबों से देश को बचाए रखा और देश की स्वतंत्रता पर आँच नहीं आई।इनका राजशाही का निशान बराह (जंगली शूअर) है। ठीक उसी समय मुस्लिम धर्म का जन्म हुआ और इनके प्रतिरोध के कारण ही उन्हे हिंदुस्तान मे आपना राज कायम करने मे 300 साल लग गए। वीर गुर्जर ही भारतीय संस्कृति के रक्षक बने। और इनके राजशाही के निशान वराह को ब्राह्मणो ने विष्णु का अवतार माना और भारतीय संसकृति के रक्षक होने के कारण ब्राह्मणो ने इनका राजतिलक किया और इनको क्षत्रिय नाम दिया ।          
          

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