Thursday, Feb 09, 2023
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गर्मागरम बहस के बीच लोकसभा ने दिल्ली नगर निगम संशोधन विधेयक को दी मंजूरी  

  • Updated on 3/30/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। लोकसभा ने दिल्ली के तीन नगर निगमों के एकीकरण के प्रावधान वाले ‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022’ को बुधवार को मंजूरी दे दी। निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कई सदस्यों ने सवाल किया कि यह विधेयक क्यों लाए और कुछ सदस्यों ने इसे पेश करने के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए। शाह ने कहा कि केंद्र द्वारा लाये गये संशोधन विधेयक में तीनों निगमों को एक करने का प्रावधान है क्योंकि संसाधन और सहकारितावादी ²ष्टि से एक ही निगम पूरी दिल्ली की नागरिक सेवाओं का ध्यान रखेगा तो उचित होगा।      उन्होंने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 239 (क) (क) के तहत प्रदत्त अधिकार के माध्यम से विधेयक लाए जिसमें कहा गया है कि ससंद को दिल्ली के संघ राज्य क्षेत्र से जुड़े किसी भी विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।   

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    उन्होंने कहा कि यह पता होना चाहिए कि दिल्ली एक संघ राज्य क्षेत्र है, ऐसे में विपक्षी सदस्यों को इस लिहाज से सदन को गुमराह नहीं करना चाहिए । शाह ने कहा कि हम इस बारे में फैलायी जा रही भ्रांति का खंडन करना चाहते हैं और यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस विधेयक को पूरी तरह से संविधान प्रदत्त तरीके से लाया गया है और यह राज्य के अधिकार का किसी प्रकार से अतिक्रमण नहीं है। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखें। मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ‘दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी प्रदान कर दी।       उन्होंने कहा कि दिल्ली के पांचवें वित्त आयोग ने तीन निगमों को 40,561 करोड़ रुपये देने की अनुशंसा की थी लेकिन दिल्ली सरकार ने 7,000 करोड़ रुपये से भी कम राशि दी, ऐसे में इस घाटे की भरपायी कैसे की जायेगी ।    

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 उन्होंने कहा कि तीन निगम बनने के बाद आज घाटा 11 हजार करोड़ रुपये है। शाह ने कहा, ‘‘सवाल उठता है कि यह किसकी जिम्मेदारी है?’’  शाह ने कहा कि इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए।  उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने काफी कम पैसा दिया लेकिन फिर भी तीनों निगमों के मेयर ने अच्छा काम किया।  उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की कई महत्वपूर्ण सिफारिशों को दिल्ली सरकार ने नहीं माना, कई अनुरोधों को खारिज कर दिया और कई लंबित हैं। शाह ने कहा कि ऐसे में निगम काम कैसे करेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास पैसों की कमी है तो विज्ञापनों के इतने सारे पैसे कहां से आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे को नहीं तोड़ रही।    

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  शाह ने कहा कि एकीकृत निगम होने से एक मेयर होगा, 25 समितियां होंगी, एक आयुक्त होंगे तथा निर्णयों में एकरूपता रहेगी। उन्होंने कहा कि एक ही शहर में कर के दो प्रकार के ढांचे नहीं रहेंगे, वित्तीय स्थिति ठीक रहेगी और सालाना लगभग 150 करोड़ रुपये बच सकेंगे।  इससे पहले विधेयक को चर्चा एवं पारित होने के लिये रखते हुए शाह ने कहा कि ‘‘दिल्ली सरकार निगमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसके कारण तीनों निगम अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए पर्याप्त संसाधनों से लैस नहीं हो पा रहे।’’     

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विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि वर्ष 2011 में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र की विधानसभा द्वारा दिल्ली नगर निगम संशोधन अधिनियम 2011 द्वारा उक्त अधिनियम को संशोधित किया गया था जिससे उक्त निगम का तीन पृथक निगमों में विभाजन हो गया।    इसमें कहा गया कि तत्काल दिल्ली नगर निगम के तीन भागों में विभाजन करने का मुख्य उद्देश्य जनता को अधिक प्रभावी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिये दिल्ली में विभिन्न केंद्रों में सुसंबद्ध नगर पालिकाओं का सृजन करना था, फिर भी दिल्ली नगर निगम का तीन भागों में विभाजन राज्य क्षेत्रीय प्रभागों और राजस्व सृजन की संभाव्यता के अर्थ में असमान था।     इसमें कहा गया है कि समय के साथ दिल्ली के तीन नगर निगमों की वित्तीय कठिनाइयों में वृद्धि हुई जिससे वे अपने कर्मचारियां को वेतन और सेवानिवृत्ति फायदे प्रदान करने में अक्षम हो गए।

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वेतन और सेवानिवृत्ति फायदे प्रदान करने में विलंब का परिणाम नगर निगम कर्मचारियों द्वारा निरंतर हड़ताल के रूप में सामने आया जिसने न केवल नागरिक सेवाओं को प्रभावित किया बल्कि इससे सफाई और स्वच्छता से संबंधित समस्याएं भी उत्पन्न हुईं।     इसमें कहा गया है कि दिल्ली में तीन समवर्ती नगर निगमों के सृजन का मुख्य उद्देश्य जनता को प्रभावी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराना था। मसौदे के अनुसार पिछले 10 वर्षो का अनुभव यह दर्शाता है कि संसाधनों की अपर्याप्तता और निधियों के आवंटन एवं जारी करने की अनिश्चितता के कारण तीनों निगम गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं जिससे उनके लिये वांछित स्तर पर दिल्ली में नागरिक सेवाओं को बनाए रखना कठिन हो गया।  

जम्मू कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होंगे चुनाव: शाह 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में परिसीमन की कवायद पूरी होने और राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद विधानसभा चुनाव कराये जाएंगे। दिल्ली के तीन नगर निगमों के एकीकरण से संबंधित विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने कश्मीर में विधानसभा चुनाव में देरी होने के विषय पर चिंता जाहिर की थी। चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधान समाप्त किये जाने के समय संसद में जो कहा था, वह सबके सामने है और रिकॉर्ड पर है। 

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शाह ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट कहा था कि जम्मू कश्मीर में पहले पंचायत चुनाव होंगे, इसके बाद परिसीमन की कवायद होगी और यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव कराये जाएंगे तथा जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होगा। उन्होंने कहा, ‘‘पंचायत चुनाव बिना हिंसा के संपन्न हो गये। जिला पंचायत चुनाव हो चुके हैं। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। मैं यह बात एक बार फिर दोहराना चाहूंगा कि परिसीमन पूरा होने के बाद हम राजनीतिक दलों से परामर्श करके चुनाव कराएंगे।’’ जम्मू कश्मीर में जून 2018 से राष्ट्रपति शासन लागू है। भाजपा ने तब मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लिया था। मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। जम्मू कश्मीर अब विधानसभा के साथ केंद्रशासित प्रदेश है। 

 

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