Tuesday, Apr 07, 2020
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इस बार ही नहीं पहले भी जनता को देख नेताओं के बिगड़े हैं बोल

  • Updated on 4/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गत 15 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश को भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मां की गाली का इस्तेमाल करते नजर आते हैं। प्रचार के जोर पकडऩे के साथ ही नेताओं की जुबान बेकाबू होकर फिसलने लगती है।

इस बार सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चुनाव आयोग ने चार बड़े नेताओं जिनमें बसपा प्रमुख मायावती, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री मैनका गांधी और सपा नेता आजम खान शामिल हैं, को दो से तीन दिन के लिए प्रचार करने से रोका। ऐसा नहीं है कि इस चुनाव में पहली बार नेता बदजुबानी कर रहे हैं। 2014 के चुनाव में भी उनकी जुबान इसी तरह चली थी और चुनाव आयोग से नोटिस भी मिले थे। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं दिखा।

2019

योगी आदित्यनाथ, मेरठ रैली, 12 अप्रैल, 2019

अगर कांग्रेस, सपा, बसपा और रालोद को अली पर भरोसा है तो हमें बजरंगबली पर भरोसा है। 

मायावती, बसपा सुप्रीमो, 8 अप्रैल 2019

कांग्रेस बीजेपी को टक्कर नहीं दे सकती। मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को वोट देकर उसे जाया करने के बजाय महागठबंधन के पक्ष में एक तरफा मतदान करें। 

मेनका गांधी, 12 अप्रैल 2019, सुल्तानपुर में एक जनसभा में 

अगर मेरी जीत मुसलमानों के बिना होगी, तो मुझे बहुत अच्छा नहीं लगेगा। क्योंकि इतना मैं बता देती हूं कि दिल खट्टा हो जाता है। फिर जब मुसलमान आता है काम के लिए तो मैं सोचती हूं कि रहने दो क्या फर्क पड़ता है।

उमा भारती, 16 अप्रैल 2019, छत्तीसगढ़ के 

देश प्रियंका गांधी वाड्रा को एक चोर की पत्नी के तौर पर जानता है। वह लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता पर कोई असर नहीं डाल पाएंगी। जिसके पति पर चोरी का आरोप हो, उनका जनता पर क्या असर होगा।

आजम खान, 14 अप्रैल 2019, रामपुर में एक चुनासभा

जिसको हम उंगली पकड़कर रामपुर लाए, आपने दस साल जिनसे प्रतिनिधित्व कराया...उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनका अंडरवियर खाकी रंग का है।

साक्षी महाराज, 16 मार्च 2019, उन्नाव में

मैं एक संन्यासी हूं और जो भी मेरे दिमाग में आता है वह मैं बोल देता हूं। मेरा मानना है कि इन चुनावों के बाद 2024 में कोई चुनाव नहीं होंगे। केवल एक यही चुनाव बचा है जो कि देश के नाम पर लड़ा जाएगा। 

(हालांकि बाद में साक्षी महाराज ने सफाई दी कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया)

साक्षी महाराज, 12 अप्रैल 2019,
उन्नाव  के सोहरामऊ पुलिस स्टेशन में इस बयान पर साक्षी के खिलाफ मुकद्दमा भी दर्ज हुआ

मैं संन्यासी हूं । आप जिताओगे तो काम करूंगा । नहीं तो मंदिर में जाकर भजन कीर्तन करूंगा। संन्यासी जब किसी के दरवाजे पर आता है और भिक्षा मांगता है, याचना करता है ... अगर उसकी बात कोई नहीं मानता है तो वह गृहस्थी के पुण्य ले जाता है और अपने पाप देकर चला जाता है।

2014

सलमान खुर्शीद, 26 अप्रैल 2014, झांसी में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य की चुनाव प्रचार सभा में 

मोदी की आंखें राक्षस जैसी मोदी की मूंछें लंबी हैं। उनकी आंखें राक्षस जैसी दखती हैं। मोदी जब भाषण देते हैं, तब ऐसा लगता है जैसे कोई भोंपू लगा हो। मोदी ने मीडिया को मैनेज कर लिया है। मीडिया उनको इतना ज्यादा दिखा रहा है, तभी मूंछ लंबी दिखने लगी है।

उमा भारती, 1 मई 2014, झांसी के ललितपुर में चुनाव सभा में बयान

प्रियंका की तुलना राखी सावंत से राबर्ट वाड्रा की पत्नी इस लायक नहीं हैं कि मोदी जी पर टिप्पणी करें। प्रियंका सुर्खियों में रहने के लिए राखी सावंत की तरह कुछ भी बोलती हैं। इस बयानबाजी का कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होने वाला।

गिरिराज सिंह, 14 मई 2014, नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में

जब आतंकवाद के मामलों में गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्ति एक ही समुदाय विशेष से आते हैं तो धर्मनिरपेक्ष नेता चुप्पी क्यों साधे रहते हैं। क्या यह सही नहीं है कि पकड़े गये सभी आतंकवादी एक ही समुदाय से हैं। 

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