Sunday, Jan 19, 2020
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लोकसभा से पास हुआ संविधान का 126वां संशोधन बिल, 10 साल के लिए बढ़ा दलित आरक्षण

  • Updated on 12/10/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। लोकसभा (Loksabha) और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) से जुड़ी बिल मंगलवार को संसद के निचले सदन लोकसभा से पास हो गया। यह संशोधन पूरी तरह पारित होने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी/ एसटी के लिए आरक्षण (reservation) की सीमा 10 वर्ष और बढ़ जाएगी, लेकिन विधायिका में आंग्ल-भारतीय (anglo indian) समुदाय के व्यक्ति को मनोनीत करने की व्यवस्था अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो जाएगी।

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2020 में होगा समाप्त
उल्लेखनीय है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में इन श्रेणियों के लिए आरक्षण 25 जनवरी 2020 को समाप्त होने वाला है। संविधान संशोधन विधेयक के मुताबिक जब संविधान लागू हुआ था, तब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति एवं अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की अवधि 70 वर्ष निर्धारित की गई थी।           
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2030 तक बढ़ाने का है प्रस्ताव
अनुसूचति जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए आरक्षण विधेयक को 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है जबकि आंग्ल भारतीय समुदाय के लिए यह व्यवस्था समाप्त की जा रही है। संविधान के अनुच्छेद 334 के मुताबिक इन समुदायों को विधायिका में 70 वर्षों के लिए 25 जनवरी 2020 तक आरक्षण की व्यवस्था थी। संसद में अनुसूचित जाति के 84 सदस्य और अनुसूचित जनजाति के 47 सदस्य हैं।        
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इतने हैं सदस्य
देश भर की राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति के 614 सदस्य और अनुसूचित जनजाति के 554 सदस्य हैं।         लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक अभी आंग्ल भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को लोकसभा में मनोनीत करने का प्रावधान है लेकिन अभी तक उन्हें मनोनीत नहीं किया गया है।      

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