lolark-kund-of-banaras-people-take-bath-for-childrens

काशी के इस कुंड का है बड़ा महत्व, पूरी होती है संतान की मन्नत

  • Updated on 9/17/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। काशी के लोलार्क कुंड में डुबकी लगाने के लिए लोगों का भीड़ उमड़ पड़ी है। अस्सी के भैदानी स्थित प्रसिद्ध लोलार्क कुंड पर हर साल लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगता है। 

Navodayatimes

काशी के लक्खा मेलों में शुमार लोलार्क पष्ठी स्नान की मान्याता है कि संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले दंपतियों की मनोकामना लोलार्केश्वर महादेव पूरी कर देते हैं। इस कुंड का बड़ा ही महत्व है, आइये जानते है इस कुंड की 

इस आरती को पढ़ करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा, मिलेगा फायदा

Navodayatimes

लोलार्क कुंड में स्नान करने के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की यहां भीड़ जुटती है। वाराणसी में अस्सी स्थित भदैनी के लोलार्क कुण्ड पर हर साल सूर्य पष्ठी पर लाखों लोगों की भीड़ जुटती है।

Navodayatimes

लोलार्केश्वर महादाव मंदिर के महंत के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित कूच विहार स्टेट के एक राजा चर्मरोग से पीड़ित और निसंतान थे। यहां स्नान करने से न केवल उनका चर्मरोग ठीक हुआ बल्कि उन्हें पुत्र की प्राप्ति भी हुई। बता दें कि उन्होंने इस कुंड का निर्माण सोने की ऊंट से कराया था।

ऋषि पंचमी 2018: अनजानें में हुए पापों से पाना चाहते हैं मुक्ति तो करें ये व्रत

Navodayatimes

लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद्र के शुक्ल पक्ष की पष्ठी वाले दिन कुंड से लगे कूप से पानी आता है। सूर्य की रश्नियों के पानी में पड़ने से संतान उत्पत्ति का योग बनता है। मान्यता है कि इस दौरान महिलाओं के स्नान करने से उन्हें संतान प्राप्त होती हैं। 

Navodayatimes

संतान की रक्षा के लिए भी महिलाएं कुंड़ में स्नान करती हैं। संन्यासी लोग भी यहां मोक्ष के लिए स्नान करते हैं। स्नान करने के बाद दंपति कुंड पर ही अपने कपड़े छोड़ देते हैं। यहां एक फल का त्याग करने का भी विधान है। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.