Tuesday, Jul 05, 2022
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madani, angry with gyanvapi, said this in the meeting of jamiat

जमीयत की बैठक में भावुक हुए मदनी, कही ये बात

  • Updated on 5/28/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने मुल्क में कथित तौर पर बढ़ती साम्प्रदायिकता पर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि सभाओं में अल्पसख्यकों के खिलाफ कटुता फैलाने वाली बातें की जाती हैं लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

मुस्लिम संगठन ने यह आरोप भी लगाया कि देश के बहुसंख्यक समुदाय के दिमाग में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के ‘संरक्षण में काहर घोला जा रहा है’। जमीयत ने दावा किया कि ‘छद्म राष्ट्रवाद’ के नाम पर राष्ट्र की एकता को तोड़ा जा रहा है जो ना सिर्फ मुसलमानों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बेहद खतरनाक है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की मज्लिसे मुंतकिमा (प्रबंधक समिति) के अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें ‘केंद्र सरकार से उन तत्वों पर और ऐसी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने’ का आग्रह किया गया है जो लोकतंत्र, न्यायप्रियता और नागरिकों के बीच समानता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं और इस्लाम तथा मुसलमानों के प्रति कटुता फैलाती हैं।

प्रस्ताव में दावा किया गया है, देश धार्मिक बैर और नफरत की आग में जल रहा है। चाहे वह किसी का पहनावा हो, खान-पान हो, आस्था हो, किसी का त्योहार हो, बोली (भाषा) हो या रोकागार, देशवासियों को एक दूसरे के खिलाफ उकसाने और खड़ा करने के दुष्प्रयास हो रहे हैं।

प्रस्ताव के मुताबिक, सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि सांप्रदायिकता की यह काली आंधी मौजूदा सत्ता दल व सरकारों के संरक्षण में चल रही है जिसने बहुसंख्यक वर्ग के दिमागों में काहर भरने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों, पुराने कामाने के मुस्लिम शासकों और इस्लामी सभ्यता व संस्कृति के खिलाफ भद्दे और निराधार आरोपों को जोरों से फैलाया जा रहा है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि सत्ता में बैठे लोग उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें आजाद छोड़ कर और उनका पक्ष लेकर उनके हौसले बढ़ा रहे हैं।

प्रस्ताव में कहा गया है, जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस बात पर चिंतित है कि खुलेआम भरी सभाओं में मुसलमानों और इस्लाम के खिलाफ शत्रुता के इस प्रचार से पूरी दुनिया में हमारे प्रिय देश की बदनामी हो रही है और इससे देश विरोधी तत्वों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का मौका मिल रहा है।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है, राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए किसी एक वर्ग को दूसरे वर्ग के खिलाफ भड़काना और बहुसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्तेजित करना, देश के साथ वफादारी व भलाई नहीं है, बल्कि खुली दुश्मनी है। प्रस्ताव में आगाह किया है, अगर फासीवादी संगठन और उनके हिमायती यह समझते हैं कि देश के मुसलमान इस जुल्म के आगे घुटने टेक देंगे... तो यह उनकी भूल है।

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