Thursday, Jan 27, 2022
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चंचल मिजाज के साथ ही दूसरों को आकर्षित करते हैं मिथुन राशि के व्यक्ति

  • Updated on 2/4/2021

नई दिल्ली/गुरमीत बेदी। मिथुन (Gemini) राशि वायु तत्व प्रधान है। इसी गुण धर्म के अनुसार मिथुन राशि वाले स्वभाव में मौजी और चंचल और पढ़ने-लिखने के शौकीन भी होते हैं लेकिन बार-बार निर्णय बदलने के कारण अधिकतर समय अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं इसलिए मिथुन राशि वालों को द्वि-स्वभाव राशि वाले जातक भी कहा जाता है।

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इस राशि का स्वामी ग्रह बुध है लिहाजा जातक लेखक, पत्रकार और लिखने-पढ़ने के शौकीन होते हैं। अन्वेषण व ज्योतिष में भी उनकी गहरी रुचि होती है। ऐसे जातक अच्छे लेखा परीक्षक और वकालत में भी सफल होते हैं। वाकपटु भी होते हैं और भाषण कला में प्रवीण भी। किसी भी परिस्थिति में किसी भी उम्र के लोगों के साथ घुल-मिल जाते हैं और अपना काम निकालने में माहिर होते हैं।

इनके भीतर तुरन्त सीखने की क्षमता भी होती है लेकिन बड़बोले भी होते हैं। जिज्ञासु होते हैं और रोमांटिक भी। कल्पनाओं में भी विचारते रहते हैं। इनके मित्र बहुत होते हैं और विपरीत ङ्क्षलग की तरफ भी सहज ही आकॢषत और मोहित हो जाते हैं।

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मिथुन राशि की महिलाएं बहुत ही संवेदनशील होती हैं और सच्चे प्रेम के लिए लालायित रहती हैं। इस राशि के लोग अपने उत्सुकता से भरे स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। इनके बारे में पहले से कुछ भी कहना मुश्किल होता है। किसी पल जहां ये अपने रिश्ते को लेकर काफी इमोशनल हो जाते हैं वहीं दूसरे पल ये हर बात आत्मसम्मान पर ले लेते हैं। ये अपनी बातों को एक्सप्रैस नहीं कर पाते हैं।

मिथुन राशि के लड़कों का व्यक्तित्व काफी चुंबकीय होता है। लोग इनसे आकॢषत हुए बिना नहीं रह सकते। ये हमेशा जीवन में कुछ नया करना पसंद करते हैं। प्रेम के लिए ये लोग अपने साथी से समझौता करने में गुरेज नहीं करते हैं। हालांकि नएपन की तलाश के चलते ये उतने कमिटेड साबित नहीं होते।

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कुछ ज्योतिर्विदों की राय में मिथुन राशि का प्रतीक चूंकि युवा दंपति है, इसलिए यह द्वि-स्वभाव वाली राशि है। मृगशिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल-शुक्र है। मंगल शक्ति और शुक्र माया है। जातक के अंदर माया के प्रति भावना पाई जाती है, जातक जीवन साथी के प्रति हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होता है। साथ ही घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में तनाव रहता है। मंगल और शुक्र की युती के कारण जातक में स्त्री रोगों को परखने की अद्भुत क्षमता होती है। जातक वाहनों की अच्छी जानकारी रखता है। इनका घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक झुकाव होता है।

मंगल के कारण जातक बात का धनी बन जाता है। गुरु आसमान का राजा है तो राहू गुरु का चेला, दोनों मिलकर जातक में आसमानी ताकतों को बढ़ाते हैं। जातक में अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के बारे में पता करने की योग्यता जन्मजात पैदा होती है। यह वायुयान और सैटेलाइट के बारे में ज्ञान बढ़ाता है। राहू-शनि के साथ मिलने से जातक के अंदर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है।

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जातक का कार्य शिक्षा स्थानों में या बिजली, पैट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है। जातक एक दायरे में रह कर ही कार्य कर पाता है और पूरा जीवन कार्योपरांत फलदायक रहता है। जातक के अंदर एक मर्यादा जो धर्म में लीन करती है और जातक सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अपने को रत रखता है।

मिथुन राशि पश्चिम दिशा की द्योतक है, जो चंद्रमा की निरयण समय में जन्म लेते हैं, वे मिथुन राशि के कहे जाते हैं। जातक में चंचलता रहती है। शरीर बलवान नहीं रह पाता है, आंखों का रंग भूरा या नीला होता है, शरीर का रंग सांवला या गोरा कैसा भी हो सकता है। मिथुन राशि वालों को दुर्बोध माना जाता है। इसका स्वामी बुध है। बुध की धातु पारा है और इसका स्वभाव जरा-सी गर्मी-सर्दी से ऊपर नीचे होने वाला है।

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ऐसे जातकों में दूसरे की मन की बातें पढ़ने, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुराई से कार्य करने की क्षमता होती है। मति और वाणी की चतुराई से इस राशि के लोग कुशल कूटनीतिज्ञ और राजनीतिज्ञ भी बन जाते हैं, हर कार्य में जिज्ञासा और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफलता लेते रहते हैं।        

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