Saturday, Mar 23, 2019

चार मार्च को बरसों बाद आ रहा महाशिवरात्रि का 'महायोग'

  • Updated on 2/28/2019

हरिद्वार/नवीन पाण्डेय। इस बार महाशिवरात्रि का पावन पर्व विशेष योग में पड़ने जा रहा है, जो भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण कर देगा। देवाधिदेव महादेव के सबसे प्रिय दिन यानी सोमवार को महाशिवरात्रि पड़ रहा है। लिहाजा, इस शिवरात्रि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। 

करीब 3 साल बाद सर्वार्थ सिद्धि योग में महाशिवरात्रि का जलाभिषेक शिवालय में किया जाएगा जिसका संपूर्ण लाभ सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, जीवन में खुशहाली सहित सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होगा। फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी चार मार्च को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। 

महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में होने के कारण भक्तों के लिए विशेष फलदायी योग बना रहा है। सोमवार का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा भगवान शिव की जटा व मस्तिष्क पर विराजमान है। इसलिए भगवान शिव को सोमनाथ भी कहा जाता है। इसके अलावा चतुर्दशी का स्वामी भी चंद्रमा ही है। चंद्रमा मन का भी कारक है, इसलिए मन से शिव की पूजा करनी चाहिए। 

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इसके अलावा श्रवण नक्षत्र में की जाने वाली पूजा भगवान शिव को ही अर्पित होती है। शास्त्रों के मुताबिक भांग, धतूरा, बेलपत्र और गन्ने के रस, शहद, दूध, दही, घी, पंचामृत, गंगाजल, दूध मिश्रित शक्कर अथवा मिश्री से शिव आराधना करने अथवा चढ़ाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। इस दिन रात्रि जागरण और रुद्राभिषेक करने से प्राणी जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।

2016 में बना था ऐसा योग
शुभ संयोग इससे पहले वर्ष 2016 में बना था, जो कि अब तीन साल बाद 2019 में बन रहा है। यह शुभ संयोग लोगों द्वारा रखे गए व्रत, किए गए दान-पुण्य आदि जीवन में सुख शांति को बढ़ाएंगे। फाल्गुन की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिये गंगाजल भी लेकर आते हैं जिससे भगवान शिव को स्नान करवाया जाता हैं।

ये है महाशिवरात्रि पर पूजन काल

निशीथ काल पूजा- 12:07 से 12:57
पारण का समय- 06:46 से 03:26 (5 मार्च)
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 04:28 (4 मार्च)
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 9:07 (5 मार्च)

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