Wednesday, Oct 16, 2019
maharashtra amit shah starts bjp campaign does not mention shiv sena in speech

महाराष्ट्र: शाह ने भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की, भाषण में शिवसेना का जिक्र नहीं

  • Updated on 9/23/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। महाराष्ट्र में भाजपा और सहयोगी शिवसेना में जारी खींचतान रविवार को साफतौर पर उजागर हो गयी। जब गृहमंत्री अमित शाह (Amit shah) ने औपचारिक रूप से विधानसभा चुनाव के प्रचार का बिगुल फूंका लेकिन अपने भाषण में उन्होंने उद्धव ठाकरे (UDDHAV THACKERAY) के नेतृत्व वाली पार्टी का जिक्र नहीं किया। हालांकि उन्होंने कहा कि राजग राज्य में तीन चौथाई बहुमत से जीत दर्ज करेगा।   

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शाह ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए साफ संकेत दिये कि भाजपा अपने चुनाव प्रचार में अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को हटाये जाने के निर्णय को चुनाव प्रचार में उठाएगी। महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को एक ही चरण में चुनाव होंगे और मतगणना 24 अक्टूबर को होगी। शाह ने उपनगर गोरेगांव में चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की और अनुच्छेद 370 (Article 370) का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि राज्य चुनाव के लिये चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को हटाने के हमारे फैसले पर चर्चा से शुरू हो रही है।     

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शिवसेना (shiv sena) का जिक्र किये बगैर शाह (Amit shah) ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव की घोषणा हो गयी है। मुझे यकीन है कि भाजपा को बहुमत मिलेगा। महाराष्ट्र में राजग (भाजपा, शिवसेना और छोटे सहयोगी दलों) को (288 सदस्यीय विधानसभा में) तीन चौथाई बहुमत मिलेगा।  शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा और शिवसेना इस चुनाव के लिये सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहे हैं।  संपर्क किये जाने पर भाजपा के एक वरिष्ठ ने कहा कि रविवार को शाह और उद्धव के बीच बैठक होने की कोई योजना नहीं थी।     

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गौरतलब है कि शाह लोकसभा चुनाव के लिये गठबंधन को लेकर इस साल फरवरी में यहां ठाकरे के निवास स्थान ‘‘मातोश्री’’ में करीब तीन घंटे रुके थे।  हालांकि लोकसभा चुनाव में जबसे भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है तब से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत पार्टी का कोई नेता ठाकरे निवास पर नहीं गया। रैली में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अगर जवाहर लाल नेहरू असमय पड़ोसी देश के साथ संघर्ष विराम की घोषणा नहीं करते तो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) अस्तित्व में नहीं आता। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री (नेहरू) के बजाय देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को यह मुद्दा सुलझाना चाहिए था।     

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शाह ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस चुनाव बाद भी इस पद पर बने रहेंगे। शाह के इस बयान को शिवसेना की अनदेखी करने के तौर पर देखा जा रहा है, जो मुख्यमंत्री पद के लिये पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को अपने उम्मीदवार के तौर पर पेश कर रही है।  इसका अर्थ है कि भाजपा पीछे हटने के मूड में नहीं है और शिवसेना की रणनीति बीते समय में एक बार से अधिक उजागर हुई है।  नासिक में बृहस्पतिवार को एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी पर निशाना साधा था।     

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अपने भाषण में मोदी ने कहा था कि ‘‘मैं राम मंदिर मुद्दे पर बयान बहादुरों और बड़बोलों को देखकर हैरान हूं। देश में हर किसी को उच्चतम न्यायालय का सम्मान करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय इस मामले की सुनवाई कर रहा है। मैं हाथ जोड़कर इन लोगों से कहना चाहता हूं कि न्यायिक प्रणाली में विश्वास रखें।  कुछ दिन पहले मुंबई में मेट्रो लाइन के उद्घाटन कार्यक्रम में ठाकरे ने मोदी की मौजूदगी में राम मंदिर का मुद्दा उठाया था।   

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